
आज़ादी के बाद से अब तक रेलवे सुविधाओं से वंचित रहे जनजाति जिले बांसवाड़ा को एक बार फिर रेल मार्ग से जुड़ने की उम्मीद जग गई है. राजस्थान में जल्द विधानसभा चुनाव होने है और चुनावी काल में रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट की कवायद शुरू हो गई है. बता दें, करीब 12 साल पहले बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका है.
गौरतलब है वर्ष 2011 में केंद्र में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रारंभ हुए प्रोजेक्ट को तकनीकी अड़चनों और सात साल की देरी के चलते रेलवे ने पांच साल पहले फ्रीज (बंद) कर दिया था, लेकिन अब राजस्थान में होने विधानसभा चुनाव को देखते हुए बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है.
इस प्रोजेक्ट के लिए पूर्ववर्ती भाजपा शासन काल में बजट की कमी को लेकर हाथ खड़े कर दिया गया था, लेकिन अब केंद्र सरकार की दखल के बाद प्रोजेक्ट की फाइलें फिर दौड़ने लगी हैं. नई रेल लाइन पूर्व सर्वे के अनुसार बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए लगभग 192 किमी लंबी लाइन बिछाई जानी है, जो डूंगरपुर से प्रारंभ होकर रतलाम मंडल के मोरवानी स्टेशन के पास आकर दिल्ली मुंबई रूट से जुड़ेगी.

12 वर्ष पूर्व हुए रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल लाइन की शिलान्यास की तस्वीर
राज्य सरकार और रेलवे विभाग के सहयोग से होगा काम
रिपोर्ट के मुताबिक इस लाइन के लिए जमीनें पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है, जिसे सौंपने के लिए रेलवे ने मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार को पत्र भी लिख दिया गया है. साथ ही, खर्च का हिस्सा लगाने के लिए रिवाइज एस्टीमेट भी बन रहा है. बताया जाता है देरी होने के चलते प्रोजेक्ट की लागत 6 हजार करोड़ रुपए के पार जा सकती है.
50 फीसदी राजस्थान सरकार 50 फीसदी रेलवे खर्च करेगी वहन
इस प्रोजेक्ट में 50 फीसदी राजस्थान सरकार, जबकि 50 फीसदी रेलवे खर्च करेगा. फिलहाल रेलवे ने अपने हिस्से वाले 50 फीसदी पर काम प्रारंभ कर दिया है. उत्तर-पश्चिम रेलवे ने स्टेशन बिल्डिंग निर्माण, रेलवे ओवर व अंडर ब्रिज निर्माण के साथ कटिंग व अन्य अर्थ वर्क के लिए टेंडर भी के निकाल दिए हैं.
75 फीसदी वितरित की जा चुकी है मुआवजा राशि
परियोजना के लिए रेलवे बोर्ड और राज्य सरकार के बीच हुए एमओयू के अनुसार लागत की 50 फीसदी राशि रेलवे बोर्ड जबकि 50 फीसदी राजस्थान सरकार को देनी थी. 2010- 11 में तत्कालीन मुख्यमंत्री गहलोत ने इसके लिए 200 करोड़ रुपए मंजूर किए थे. जमीन अधिग्रहण करने के बाद लगभग 75 फीसदी मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है, लेकिन पूर्व की भाजपा सरकार ने 50 फीसदी हिस्सेदारी देने से मना कर दिया. जिससे कार्य बंद हो गया और रतलाम, डूंगरपुर और बांसवाडा जिले में खोले गए रेलवे ऑफिस भी बंद कर दिए.
192 किलोमीटर लंबी है बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट
डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल लाइन प्रोजेक्ट रेल लाइन की कुल लंबाई 192 किमी है. जिसमें से राजस्थान में 142.85 किमी और मध्यप्रदेश में 49.15 किमी है. इसके लिए शुरुआती खर्च 2082.74 करोड़ रुपए आंका गया था और प्रोजेक्ट बंद होते समय इस लाइन के लिए 4262 करोड़ रुपए आंका गया था. लेकिन अब इसके लिए रिवाइज एस्टीमेट में 6 हजार करोड़ से ज्यादा का निर्धारित किया है.