
Spa and Massage Center Rules: राजस्थान में स्पा सेंटर और मसाज सेंटर के नाम पर देह व्यापार का धंधा तेजी से बढ़ रहा है. हाल में राजधानी जयपुर में कई ऐसे सेंटर का खुलासा हुआ है, जहां स्पा के नाम पर देह व्यापार का धंधा चलाया जा रहा था. जबकि राज्य के बाहर से लड़कियों को बुलाया गया था. ऐसे में जयपुर में स्पा सेंटर और मसाज सेंटर पर लगाम कसने के लिए नए नियम लागू किये गए हैं. 1 अप्रैल 2025 से इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया गया है. ऐसे में नियमों को जहां स्पा और मसाज सेंटर को लागू करना होगा, वहीं कस्टमर को भी नियमों के तहत चलना होगा.
पुलिस आयुक्तालय जयपुर ने शहर में संचालित स्पा और मसाज सेंटर्स पर सख्ती बढ़ाते हुए नए नियम लागू किए हैं. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ रामेश्वर सिंह ने आदेश जारी कर इन सेंटर्स के संचालन के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए हैं.
क्या हैं नए नियम?
- अलग प्रवेश, कोई आपसी संपर्क नहीं: पुरुष और महिला ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्लॉक होंगे और उनके प्रवेश-निकास को स्पष्ट रूप से सीमांकित किया जाएगा.
- बंद दरवाजे प्रतिबंधित: मसाज रूम के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होंगे, बल्कि पारदर्शिता के लिए आंशिक रूप से खुले रहने चाहिए.
- आईडी प्रूफ अनिवार्य: ग्राहकों को पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा और उनके फोन नंबर व अन्य जानकारी रजिस्टर में दर्ज की जाएगी.
- स्टाफ के लिए योग्यता अनिवार्य: मसाज करने वाले कर्मचारियों के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से फिजियोथेरेपी, एक्युप्रेशर या प्रोफेशनल डिप्लोमा होना जरूरी होगा.
- कम से कम 18 वर्ष की आयु: सभी कर्मचारियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय की गई है.
- पुलिस वेरिफिकेशन आवश्यक: स्पा/मसाज सेंटर में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का पुलिस चरित्र सत्यापन (पीसीसी) अनिवार्य होगा.
- बाहरी बोर्ड और हेल्पलाइन नंबर: सभी सेंटर्स को अपने परिसर में स्पष्ट रूप से लाइसेंस नंबर, काम के घंटे और हेल्पलाइन नंबर (112, 181) प्रदर्शित करने होंगे.
अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई सेंटर अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. यह आदेश 1 अप्रैल 2025 से 30 मई 2025 तक प्रभावी रहेगा. इसका उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी. पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम मानव जीवन और कानून-व्यवस्था की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.
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