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बाड़मेर-बालोतरा की सीमा बदलाव पर बवाल, हरीश चौधरी ने सरकार पर किया तीखा प्रहार

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस गलत निर्णय का जनता आने वाले समय में करारा जवाब देगी. बायतु को तोड़ने की जिम्मेदारी कोई नेता लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि यह फैसला क्षेत्र की एकता और पहचान पर गहरा आघात है.

बाड़मेर-बालोतरा की सीमा बदलाव पर बवाल, हरीश चौधरी ने सरकार पर किया तीखा प्रहार
बाड़मेर-बालोतरा की सीमा बदलाव पर बवाल

Rajasthan News: बाड़मेर और बालोतरा जिले की सीमाओं में बदलाव को लेकर बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व बायतु विधायक हरीश चौधरी ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने दोनों जिलों की सीमाओं में किए गए बदलाव को असंवैधानिक और जनभावनाओं के खिलाफ करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए. कांग्रेस विधायक चौधरी ने कहा कि सरकार ने थार की धरती के लोगों को बांटने का काम किया है, जिसे क्षेत्र की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी.

दरअसल, भजनलाल सरकार के 31 दिसंबर के उस नोटिफिकेशन ने क्षेत्र में राजनीतिक भूचाल ला दिया है, जिसमें बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं का पुनर्गठन किया गया. इस बदलाव से बाड़मेर से गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बायतु को वापस बाड़मेर में जोड़ दिया गया. अब इसी फैसले का कांग्रेस पार्टी विरोध कर रही है.

'जनता देगी करारा जवाब'

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस गलत निर्णय का जनता आने वाले समय में करारा जवाब देगी. धोरीमन्ना में जारी अनिश्चितकालीन धरने का जिक्र करते हुए हरीश चौधरी ने बताया कि वहां आमजन और पार्टी कार्यकर्ता मिलकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं. बायतु को तोड़ने की जिम्मेदारी कोई नेता लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि यह फैसला क्षेत्र की एकता और पहचान पर गहरा आघात है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरीश चौधरी ने कहा, “मुझे तोड़ने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी. चाहे कितनी भी साजिश रची जाए, जनता मेरे साथ खड़ी है." उन्होंने सरकार के इस कदम को पूरी तरह राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताते हुए कहा कि बायतु को अलग करने का निर्णय न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में.

'सीमा बदलाव के फैसले पर पुनर्विचार करें'

यह केवल सत्ता की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास है, जिसका खामियाजा सरकार को भविष्य में भुगतना पड़ेगा. अंत में चौधरी ने राज्य सरकार से अपील की कि वह जिलों की सीमाओं में किए गए बदलाव पर तुरंत पुनर्विचार करें और थार क्षेत्र की जनता की भावनाओं का सम्मान करें. 

वहीं, सरकार के इस फैसले के खिलाफ धोरीमन्ना मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना जारी है, जिसमें धरने में डटे 75 वर्षीय हेमाराम चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के इस फैसले से हर वर्ग में गहरा आक्रोश है. यह निर्णय जनता की मूलभूत सुविधाओं पर सीधा प्रहार है. मैं सरकार से अपील करता हूं कि इस पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए. जनता की इस न्यायपूर्ण लड़ाई में मैं पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा हूं. 

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