Rajasthan News: हिंदी फिल्म दंगल गर्ल के डायलॉग "म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के? इस डायलॉग को सच साबित कर रही हैं कपड़ा नगरी भीलवाड़ा के किसान की बेटी और दंगल गर्ल अंजलि कच्छावा. किसान जगदीश कच्छवा की बेटी अंजलि अब भारतीय टीम का हिस्सा बनने जा रही है. बीते दिनों सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में राजस्थान के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला पहलवान बनीं थीं. अंजलि कच्छावा का अब वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट के लिए चयन हुआ है.
सीनियर रेसलिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी अंजलि
सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली अंजली कच्छावा जगरेब (क्रोएशिया) में 4 से 8 फरवरी तक होने वाले इस सीनियर रेसलिंग टूर्नामेंट में भाग लेगी. अंजलि कच्छावा 2 फरवरी को भारतीय टीम के लगने वाले प्रेक्टिस कैंप का हिस्सा बनेगी. 2 फरवरी से 4 फरवरी तक इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारतीय कुश्ती टीम का कैंप लगेगा.

भीलवाड़ा की दंगल गर्ल बेटी अंजलि कच्छावा के परिवार की संघर्ष की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से काम नहीं है. पिता जगदीश छोटी-मोटी किसानी का काम करते हैं. उन्होंने बेटी अंजलि को पहलवानी करवाने के लिए बहुत कुछ दांव पर लगाया. अपने प्लॉट तक बेंच दिए, मगर बेटी की पहलवानी बंद नहीं करवाई.

मां बोलीं- देश के लिए मेडल जीते तो डबल खुशी होगी
जैसे अमीर खान ने महावीर सिंह फोगाट के परिवार व बेटियों गीता और बबीता की पहलवानी की कहानी को पर्दे पर उतारा, वैसे ही कुछ कहानी अंजलि का परिवार भी समेटे है. बेटी अंजलि भी पिता के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. अंजलि के पिता जगदीश का कहना है कि बच्चों को अनुशासन में रखना सबसे जरूरी है सफलता बड़ी बात नहीं है, अनुशासन आवश्यक है. वहीं अंजलि की मां का कहना है कि बेटी पहलवान तो बन गई, मगर भारत के लिए मेडल जीते तो खुशी डबल होगी.
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