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टिब्बी एथेनॉल प्लांट विवाद: 15 माह का धरना टूटा, पुलिस छावनी में बदला इलाका, 67 लोगों ने दी गिरफ्तारी

टिब्बी एथेनॉल प्लांट विवाद में 15 माह का किसानों का धरना पुलिस ने हटा दिया। इलाके में इंटरनेट बंद कर 500+ जवान तैनात किए गए। 67 लोगों ने गिरफ्तारी दी, जबकि पुलिस सुरक्षा में निर्माण शुरू हुआ।

टिब्बी एथेनॉल प्लांट विवाद: 15 माह का धरना टूटा, पुलिस छावनी में बदला इलाका, 67 लोगों ने दी गिरफ्तारी
एथेनॉल फैक्ट्री विवाद: 15 माह का धरना टूटा, टिब्बी क्षेत्र बना 'छावनी', जानिए पूरा मामला
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Rajasthan News: राजस्थान के हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एशिया के सबसे बड़े एथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े टकराव में बदल गया है. राठीखेड़ा के चक 5 जेआरके में फैक्ट्री के विरोध में पिछले 15 माह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा किसानों और ग्रामीणों का धरना हाल ही में पुलिस-प्रशासन ने हटा दिया. इस कार्रवाई के दौरान लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया.

भारी पुलिस बल तैनात, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू

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कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए. पूरे टिब्बी क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया, जिसके लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात किया गया. माहौल को देखते हुए इलाके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं. धरना स्थल हटाए जाने के बाद माहौल गर्माने लगा. नाराज किसानों और ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए एसडीएम कार्यालय तक मार्च निकाला और वहीं पर धरना शुरू कर दिया. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने बीएनएस की धारा 163 (पहले की धारा 144) लागू कर दी, जिससे एक जगह पर लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लग गई.

विधायक के नेतृत्व में 67 लोगों की सामूहिक गिरफ्तारी

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एसडीएम कार्यालय के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, संगरिया के विधायक अभिमन्यु पूनियां के नेतृत्व में 67 महिला और पुरुषों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी. किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने शांतिपूर्ण धरना हटाने के लिए नेताओं को हिरासत में लिया और यह "आवाज दबाने की कोशिश" है. किसानों ने चेतावनी दी है कि वे इस "दमनात्मक कार्रवाई" का जवाब सरकार से जरूर लेंगे.

पुलिस सुरक्षा में शुरू हुआ फैक्ट्री का निर्माण कार्य

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विवादों के बावजूद, अब फैक्ट्री साइट पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है. पुलिस-प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच फैक्ट्री क्षेत्र में निर्माण सामग्री पहुंचाई गई और अगले ही दिन से काम शुरू कर दिया गया. यह प्लांट राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम के दौरान ₹450 करोड़ के निवेश के साथ प्रस्तावित हुआ था. प्रदूषण की आशंकाओं के कारण ग्रामीण और किसान लगातार इसका विरोध कर रहे थे, जिसके चलते डेढ़ साल से निर्माण कार्य रुका हुआ था.

प्रदूषण पर ग्रामीणों और प्रबंधन के दावे आमने-सामने

ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से जल और वायु प्रदूषण बढ़ेगा, और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होगा. उन्हें डर है कि इससे क्षेत्र में सांस संबंधी रोग और दूषित जल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा.

फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष: ZLD तकनीक से प्रदूषण 'जीरो'

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ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक जेपी शर्मा ने प्रदूषण की आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि फैक्ट्री अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित होगी. फैक्ट्री ZLD प्रणाली पर चलेगी. इसका मतलब है कि कोई भी दूषित जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि पूरे पानी को रीसाइकिल करके पुनः उपयोग किया जाएगा. धुआं ऊपरी वातावरण में छोड़ा जाएगा. राख का उपयोग ईंट भट्टों, लैंड फिलिंग और कृषि उर्वरक में किया जाएगा. यह प्लांट किसानों से लगभग ₹1000 करोड़ की मक्का और चावल खरीदेगा. पराली की खरीद से किसानों को अतिरिक्त आय होगी और करीब 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा. प्रदूषण की निगरानी का ऑनलाइन डेटा और सीसीटीवी कैमरे सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जुड़े रहेंगे.

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