
Cyber Fraud: दीपावली के दिन IDFC से UCO बैंक के कुछ खाताधारकों के खातों में जमकर धनवर्षा हुई. मगर यह वर्षा कोई मेहनत का नतीजा नहीं थी. बल्कि डिजिटल चोरी या कहे कि साइबर फ्रॉड का परिणाम थी. दीपावली की रात को अचानक से दोनों ही बैंक के खाताधारकों के खाते में सैकड़ों से लाखों रुपए तक का ट्रांसेक्शन हुआ.
इतना ही नहीं इन खातों में पैसे आने का सिलसिला तीन दिन तक चलता रहा. वहीं जब तक बैंक के संचालक को यह पूरा माजरा समझ में आता, तब तक काफी देर हो चुकी थी. साथ ही तब तक कई करोड़ रुपए इधर-उधर हो चुके थे. बैंककर्मियों ने इस घटना पर एक्शन लेते हुए तुरंत कार्यवाई की.
बैंक अधिकारियों ने जिन खातों में पैसों का ट्रांजेक्शन हुआ था, उनके खाते सीज कर दिए हैं. अब बैंक उन खाता धारकों से समझाइश, लीगल नोटिस और FIR का हथकंडा अपनाकर पैसे रिफंड करवाने में जुटी है. नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बैंक अधिकारियों ने पूरी कहानी बताई है. कहा जा रहा है कि मामले की जांच बैंक अपने स्तर से कर रही है. आगे रिकवरी में समस्या आने पर पुलिस की मदद ली जाएगी.
यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब बैंक के खाताधारक आईएमपीएस या यूपीआई से यूको बैंक खाते में पेमेंट कर रहे थे तो ट्रांजेक्शन फेल का मैसेज आता और पैसा खाते से डेबिट नहीं होता था लेकिन यूको बैंक वाले के खाते में क्रेडिट हो जाता था.
जब कुछ लोगों को इस बात का पता लगा तो दिवाली से ठीक एक दिन पहले उन्होंने 4 से 5 हजार के छोटे-छोट ट्रांजेक्शन कर बैंक की इस खामी को फायदे में तब्दील करने का तरीका खोज निकला. बीते तीन दिन में ऐसे ट्रांजेक्शन लाखों की संख्या में पहुंच गई.
दिवाली के दिन तो लोगों ने राशि हजार से लाख रुपए तक ट्रांसफर करनी शुरू कर दी. इसका फायदा उठाते हुए साइबर फ्रॉड करने वाले यूको बैंक के जिस खाते में ट्रांसफर करते उससे एटीएम से निकाल लेते, साथ ही साथ कई ऐसे खाताधारक है, जिन्होंने अपनी राशि दूसरी बैंकों के खातो में ट्रांसफर कर दी. इधर, आईडीएफसी बैंक खाते में भी पैसा कटता नहीं तो वहां से भी निकालना शुरू कर दिया. रातों रात पैसा दुगना होने के लालच की बात पूरे मारवाड़ में फैली और सोमवार को तो ट्रांजेक्शन की झड़ी लग गई.
कुछ लोगों के खातों में इस तरह से आते हुए लाखों रुपए के ट्रांसेक्शन के कारण व्यारे-न्यारे होता देख यूको बैंक में हड़कंप मच गया. वहीं बैंक अफसर परेशान हो गए. क्योंकि इस तरह से ना तो कोई लिंक जनरेट हुआ और ना ही कोई मैसेज आया. बस फोन पर बातचीत के जरिए एक-दूसरे को फोन कर जानकारी दी गई.
इस तरह से 2 -3 दिन में करोड़ों रुपए हजारों खातों में चले गए. इसको लेकर जांच शुरू कर दी गई है. संभवत आगामी दो से तीन में पता चलेगा कि यह गड़बड़ी सर्वर मर्ज के कारण हुई थी या इसके पीछे कोई अन्य पहलू है.
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