
Arjun Award Divyakirti Singh: घुड़सवारी के खेल में अर्जुन अवार्ड और एशियन गेम (Asian Game) में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली राजस्थान की दिव्यकृति ने देश का नाम रौशन किया है. 9 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों से उन्हें अर्जुन अवार्ड (Arjun Award) सौंपा गया. उन्होंने एशियन गेम में स्वर्ण पदक जीत कर पूरे देश का नाम रौशन करने के लिए सम्मानित किया गया है. वहीं, अवार्ड लेने के बाद दिव्यकृति (Divyakirti Singh) ने एनडीटीवी से बात की. जिसमें उन्होंने काफी सारी बातें की. उन्होंने जहां इसे आगे बढ़ाने के लिए देश और राज्य दोनों जगहों से सही सपोर्ट की मांग की वहीं, उन्होंने कहा कि वह फर्स्ट जरूर हैं इसमें लेकिन देश के लिए लास्ट नहीं होना चाहती है.
दिव्यकृति ने कहा कि यह अवार्ड उनके लिए सबसे बड़ा पल है और यह सपने सच जैसा है. इससे उन्हें आगे के करियर के लिए काफी मोटिवेशन मिलेगा. उन्होंने कहा कि
इस खेल में और सपोर्ट की जरूरत है
दिव्यकृति ने कहा, इस स्पोर्ट्स में मेन्स और वुमेंन्स कैटगरी अलग नहीं है. यह एक यूनिक बात है. हर स्पोर्ट्स में संघर्ष होता है. जो मेरी भी जर्नी में संघर्ष था. ये स्पोर्ट्स भारत का मुख्य स्पोर्ट्स में नहीं है लेकिन एशियन गेम्स की जीत ने और अर्जुन अवार्ड में शामिल होने पर काफी हद तक जागरुकता आएगी. हमें जितना सपोर्ट मिलना चाहिए था लेकिन उतना नहीं मिल पाया. लेकिन जागरुकता से ये जरूर अच्छा होगा.
अवार्ड केवल मेरे लिए नहीं एड्रेनल एंड फियर फोर्ड का भी
दिव्यकृति ने कहा कि हमारे घोड़े स्पोर्ट पार्टनर है मेरे घोड़े का नाम एड्रेनल एंड फियर फोर्ड है वह एक डेनिस घोड़ा है. उन्होंने कहा,
देश को घुड़सवारी में 41 साल के लंबे अंतराल के बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाने वाली और भारतीय घुड़सवारी ड्रेसाज टीम की सदस्य राजस्थान की दिव्यकृति सिंह को मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया.#ndtvrajasthan #rajasthan #arjunaaward pic.twitter.com/88PwVm0eT8
— NDTV Rajasthan (@NDTV_Rajasthan) January 9, 2024
13 साल की उम्र में शुरू की थी घुड़सवारी
दिव्यकृति ने बताया कि उन्होंने महज 3 साल पहले घुड़सवारी की ट्रेनिंग शुरू की थी. उन्होंने जर्मनी में ट्रेनिंग ली थी. हालांकि वह 13 साल की उम्र से घुड़सवारी शुरू की थी. जब उन्होंने इस खेल को शुरू किया थो तो केवल एशियन गेम तक पहुंचने का सपना देखा था. उन्होंने गोल्ड के बारे में सोचा भी नहीं था. लेकिन अब उनका अगला लक्ष्य 2028 ओलंपिक है. उन्होंने कहा कि इसके लिए काफी एक्सपीरिएंस की जरूरत होती है तो इस बार के बजाए मेरा लक्ष्य अगले ओलंपिक में होगा.
दिव्यकृति ने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से पढ़ाई के दौरान ही यूरोप में (नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, ऑस्ट्रिया) में ट्रेनिंग ले रही थीं. इतना ही नहीं, उन्होंने दुनिया में घुड़सवारी की राजधानी माने जाने वाले वेलिंगटन-फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका में भी ट्रेनिंग ली है.
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