Iran-Israel War: ईरान पर अमरीका और इजरायल के हमलों का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों तक महसूस किया जा रहा है. राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से खाड़ी देशों को होने वाला बासमती चावल का निर्यात फिलहाल ठप पड़ गया है. कोटा और आसपास के इलाकों से बड़ी मात्रा में बासमती चावल खाड़ी देशों, खासकर ईरान को भेजा जाता है. लेकिन, अब बंदरगाहों तक पहुंचा माल अटक गया है. पुराने भुगतान अटके हुए हैं, नए ऑर्डर नहीं मिल रहे. सिर्फ दो दिनों में बासमती चावल के दाम करीब 5 हजार रुपये प्रति टन तक गिर गए हैं.
एशिया की बड़ी मंडियों में शुमार है कोटा मंडी
कोटा की भामाशाह अनाज मंडी जो एशिया की बड़ी मंडियों में शुमार है, इन दिनों पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य तनाव की मार झेल रही है. कोटा और आसपास के इलाकों से बड़ी मात्रा में बासमती चावल खाड़ी देशों, खासकर ईरान को भेजा जाता है. मौजूदा हालात के चलते शिपमेंट रुक गए हैं. निर्यातकों के मुताबिक बंदरगाहों तक पहुंचा माल अटक गया है. पुराने भुगतान अटके हुए हैं, नए ऑर्डर नहीं मिल रहे,,, इसका सीधा असर बाजार पर दिखा है. सिर्फ दो दिनों में बासमती चावल के दाम करीब 5 हजार रुपये प्रति टन तक गिर गए. इसका असर धान के भावों पर भी पड़ने लगा है.
बढ़ेगा किसानों और व्यापारियों दोनों पर दबाव
निर्यातकों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक निर्यात बहाल होना मुश्किल है. स्थिति लंबी खिंची तो, स्टॉक अटकने से कैश फ्लो प्रभावित होगा. किसानों और व्यापारियों दोनों पर दबाव बढ़ेगा, वहीं भुगतान में देरी की आशंका व्यापारियों को भी परेशान कर रही है. हाड़ौती का बासमती चावल खाड़ी देशों में खास पहचान रखता है. यहां उत्पादित धान का बड़ा हिस्सा निर्यात पर निर्भर है. ऐसे में युद्ध के हालात ने पूरे सप्लाई चेन को प्रभावित किया है.
यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसे हालात
कोटा की भामाशाह अनाज मंडी में किसानों की चिंता भी बढ गई है. कोटा की भामाशाह अनाज मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसानों को भी गिरते दामों का असर झेलना पड़ रहा है. हालांकि व्यापारियों का कहना है कि किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. उनका तर्क है कि इससे पहले यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसे हालात बने थे, लेकिन बाजार ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली थी. व्यापारियों को उम्मीद है कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, निर्यात फिर शुरू होगा और कीमतों में सुधार आएगा.
फिलहाल हाड़ौती का चावल कारोबार वैश्विक घटनाओं की मार झेल रहा है. स्थानीय मंडियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक, हर कड़ी प्रभावित है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चला, तो असर और गहरा हो सकता है. लेकिन कारोबारियों और किसानों को उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और हाड़ौती का बासमती फिर से खाड़ी बाजारों में अपनी खुशबू बिखेरेगा.
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