जयपुर जिले की 7 वर्षीय भव्या चौधरी की कहानी भावुक कर देने वाली है. फागी क्षेत्र में रामचन्द्रपुरा गांव की बच्ची ने पगड़ी रस्म निभाई, जिसकी समाज में काफी चर्चा है. दादा के देहांत के बाद पौत्री ने पारंपरिक जिम्मेदारी निभाई. दरअसल, भव्या के पिता हनुमान सहाय राजस्थान पुलिस में कार्यरत थे. साल 2018 में ड्यूटी के दौरान उनका असामयिक निधन हो गया. यह परिवार के लिए बड़ा आघात था. उस कठिन समय में भव्या के दादा ने परिवार को संभाला, सहारा दिया और आगे बढ़ने का हौसला बनाए रखा. लेकिन इसी महीने उसके दादा का भी निधन हो गया.
सैंकड़ों ग्रामीण और रिश्तेदार रहे मौजूद
दादा की मृत्यु के बाद परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. परिवार की सबसे छोटी सदस्य भव्या चौधरी ने पगड़ी पहनकर यह रस्म निभाई. अंतिम संस्कार से लेकर पगड़ी रस्म तक भव्या की मौजूदगी और उसका धैर्य हर किसी को भावुक कर गया. पगड़ी पहनते समय वहां मौजूद लोगों की आंखें नम थीं. सैकड़ों ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भव्या को ढांढस बंधाया और उसके साहस की सराहना की.

मासूम ने निभाई परंपरा
राजस्थान में पगड़ी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि परिवार की प्रतिष्ठा और स्वाभिमान का प्रतीक है. पगड़ी पहनने वाला व्यक्ति परिवार की जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है. परंपरागत रूप से जब परिवार के मुखिया का निधन होता है तो पगड़ी रस्म के माध्यम से परिवार का नया उत्तराधिकारी घोषित किया जाता है. यह रस्म जिम्मेदारी, मान-सम्मान और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है.
आमतौर पर यह रस्म अंतिम संस्कार के चौथे दिन या तेहरवीं पर समाज और रिश्तेदारों की उपस्थिति में होती है. बड़े-बुजुर्ग उत्तराधिकारी के सिर पर पगड़ी बांधते हैं और तिलक लगाकर उसे परिवार का नया संरक्षक स्वीकार करते हैंय बदलते समय के साथ अब यह परंपरा भी बदलाव की मिसाल बन रही है, जहां बेटियां भी आगे बढ़कर सामाजिक रस्में निभा रही हैं. और यही रस्म, भव्या ने भी निभाई.
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