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बिजली विभाग के AEN ऑफिस में करोड़ों का गड़बड़झाला! फर्जी कनेक्शन और बिलिंग के गंभीर आरोप

पूरे खेल में पूर्व में ट्रांसफर हो चुके अधिकारी भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए, जबकि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कनेक्शन करता रहा. 

बिजली विभाग के AEN ऑफिस में करोड़ों का गड़बड़झाला! फर्जी कनेक्शन और बिलिंग के गंभीर आरोप
बिजली विभाग के AEN ऑफिस में करोड़ों का गड़बड़झाला!

राजस्थान में जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JDVVNL) के भीनमाल सहायक अभियंता कार्यालय से जुड़ा करोड़ों रुपये का बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. किसानों द्वारा बिजली कनेक्शन के लिए जमा कराई गई डिमांड राशि विभागीय रिकॉर्ड से गायब बताई जा रही है, जबकि उन्हीं कनेक्शनों पर ट्रांसफार्मर लगाकर नियमित बिल भी जारी किए जा रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि किसानों द्वारा डिमांड राशि जमा कराने के बावजूद न तो उन्हें रसीदों का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही विभागीय खातों में राशि जमा होने की पुष्टि हो रही है.

कार्यालय के रिकॉर्ड में नहीं मिला नाम

आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से बिना डिमांड राशि विभागीय खाते में जमा हुए ही ट्रांसफार्मर लगाकर कनेक्शन चालू कर दिए. एक किसान लक्ष्मण राम चौधरी द्वारा करीब 1 लाख 80 हजार रुपये की डिमांड राशि जमा कराए जाने का मामला सामने आया. जब एनडीटीवी की टीम ने भीनमाल सहायक अभियंता कार्यालय में रिकॉर्ड खंगाला तो बताया गया कि इस नाम से न तो कोई डिमांड राशि जमा है और न ही कोई डिमांड दर्ज है.

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फर्जी रजिस्ट्री-कागजात पर दिए कनेक्शन

इसके बाद जब अधिकारियों से सवाल किए गए तो वे जवाब देने के बजाय अपनी कुर्सी छोड़कर कार्यालय से बाहर जाते नजर आए. सूत्रों के अनुसार, भीनमाल सहायक अभियंता क्षेत्र में दर्जनों ऐसे कनेक्शन हैं, जो नियमों को ताक पर रखकर जारी किए गए हैं. कई मामलों में किसानों की जमीन 20 से 25 किलोमीटर दूर बताई जा रही है, जबकि फर्जी रजिस्ट्री और कागजात के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत किए गए.

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इस पूरे खेल में पूर्व में ट्रांसफर हो चुके अधिकारी भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए, जबकि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कनेक्शन करता रहा. सबसे गंभीर और शर्मनाक स्थिति तब सामने आई, जब एक ही के-नंबर से दो अलग-अलग तरीके से बिजली बिल जारी होने के प्रमाण मिले. यह सीधे तौर पर विभागीय सिस्टम और लेखा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. हैरानी की बात यह भी है कि जिस किसान की डिमांड राशि विभागीय खातों में जमा ही नहीं दिखाई जा रही है, उसी के खेत पर ट्रांसफार्मर लगाकर नियमित बिलिंग भी शुरू कर दी गई है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि डिमांड राशि आखिर गई कहां? विभागीय अकाउंटिंग एंट्री में यह रकम क्यों नहीं दिखाई दे रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? अवैध तरीके से कनेक्शन जारी कर ट्रांसफार्मर लगाने की इस प्रक्रिया से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है. पूरे मामले ने विद्युत निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई किसानों ने बताया कि समय पर ट्रांसफार्मर नहीं मिलता है कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ रहा है.

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