देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि देश में लोग सिर्फ़ कुत्तों के काटने से ही नहीं, बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों की वजह से होने वाले हादसों से भी मर रहे हैं. सिविक बॉडीज़ और राज्यों द्वारा नियमों और निर्देशों का पालन न करने पर चिंता जताते हुए तीन जजों की बेंच ने कहा कि कुछ राज्यों ने हमारे ऑर्डर मानने और दलीलों को लागू करने पर कोई जवाब नहीं दिया है. हम उन राज्यों के साथ बहुत सख्त होंगे. सभी नियमों, रेगुलेशन और SOPs का पालन करना होगा.
पहले के आदेश में बदलाव की याचिका पर सुनवाई
दरअसल, जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अपने पहले के आदेशों में बदलाव के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान तीन जजों की बेंच ने कहा कि वह सुनवाई इसलिए कर रही है, क्योंकि कई वकीलों और एनिमल एक्टिविस्ट्स ने दावा किया था कि 7 नवंबर को आदेश पास करने से पहले उनकी बात नहीं सुनी गई थी.
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सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान में 2 जजों के एक्सीडेंट
जस्टिस मेहता ने बताया कि पिछले 20 दिनों में आवारा जानवरों की वजह से राजस्थान हाई कोर्ट के दो जजों के साथ एक्सीडेंट हुए हैं और उनमें से एक जज को अभी भी हड्डी की गंभीर चोट (स्पाइनल इंजरी) है. यह एक गंभीर मुद्दा है. वहीं, जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, "इलाज से बचाव हमेशा बेहतर होता है." उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में बहस करने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि कोर्ट को सिर्फ़ इंस्टीट्यूशनल एरिया से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया है और उसने किसी भी नियम और रेगुलेशन में दखल नहीं दिया है.
सुप्रीम कोर्ट की कुछ अहम बातें-
- लोग सिर्फ कुत्तों के काटने से नहीं, बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों की वजह से होने वाले हादसों से भी मर रहे हैं.
- सिविक बॉडीज़ को नियमों और SOPs का सख्ती से पालन करना होगा.
- पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाई कोर्ट के दो जजों का आवारा जानवरों की वजह से एक्सीडेंट हुआ, एक जज को स्पाइनल इंजरी है.
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी कि जिन्होंने पिछले आदेशों पर जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- NHAI ने 1,400 किमी सड़क को कमजोर हिस्से के रूप में चिन्हित किया है, लेकिन राज्यों को कार्रवाई करनी होगी.
- कोर्ट ने सुझाव दिया कि सड़कों और एक्सप्रेसवे पर बाड़ लगाई जाए ताकि आवारा जानवरों को रोका जा सके.
बेंच ने कहा कि वह इस मामले में राज्यों और सिविक बॉडीज़ द्वारा नियमों, रेगुलेशन, मॉड्यूल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) को सख्ती से लागू करने की कोशिश कर रही है. सभी नियमों, रेगुलेशन और SOPs का पालन करना होगा. जब अलग-अलग पार्टियों की ओर से पेश कुछ वकीलों ने कहा कि कुत्तों के हमले हो रहे हैं, तो बेंच ने कहा कि वह समझती है कि बच्चों और बड़ों को कुत्तों ने काटा है और उनकी जान जा रही है.
सड़कों-एक्सप्रेस-वे पर बाड़ लगाने का सुझाव
बेंच ने आवारा जानवरों को सड़कों पर आने से रोकने के लिए सड़कों और एक्सप्रेसवे पर बाड़ लगाने का सुझाव दिया. अपनी दलीलों में सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर प्रतिक्रिया एक मैच्योर और जिम्मेदार समाज की झलक होनी चाहिए. सुनवाई के दौरान कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा कि सबसे पहले, यह कोई विरोध का मुद्दा नहीं है और हम यहां डॉग लवर्स के तौर पर हैं. अगर एक बाघ आदमखोर है, तो हम सभी बाघों को नहीं मारते. हमें यह पक्का करना होगा कि नसबंदी हो और आबादी कम होनी चाहिए.

सिब्बल ने CSVR मॉडल की ओर इशारा करते हुए कहा, "इसके लिए एक प्रोसेस है. इससे लखनऊ में कुत्तों की आबादी लगभग ज़ीरो हो गई है." उन्होंने आगे कहा कि अगर रेबीज़ वाले और बिना रेबीज़ वाले कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखा जाए, तो उन सभी को रेबीज़ हो जाएगा.
बता दें कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल और रेलवे स्टेशन जैसे इंस्टीट्यूशनल एरिया में कुत्तों के काटने की घटनाओं में "खतरनाक बढ़ोतरी" को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्देश दिया था. आवारा कुत्तों को सही तरीके से स्टेरिलाइज़ेशन और वैक्सीनेशन के बाद तय शेल्टर में भेजा जाएगा. बेंच ने यह भी कहा कि इस तरह उठाए गए आवारा कुत्तों को उस जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहाँ से उन्हें उठाया गया था.
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