Rajasthan News: राजस्थान में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने वाली 104 जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह रुक गई है. इसकी वजह से सैकड़ों महिलाओं को समय पर मदद नहीं मिल रही और उनकी जान पर बन आई है. राज्य में चल रही 600 एम्बुलेंस अब सड़कों पर नहीं दौड़ रही बल्कि पार्किंग में खड़ी धूल फांक रही हैं. इससे 1200 कर्मचारी अचानक बेरोजगार हो गए हैं और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
टेंडर समय पर नहीं हुआ शुरू
राजस्थान एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि यह संकट चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बड़ी चूक से हुआ है. सेवा चलाने वाली कंपनी 'मॉर्डन इमरजेंसी सर्विसेज' का पुराना टेंडर 10 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया था.
अधिकारियों को पहले से पता था लेकिन उन्होंने नया टेंडर समय पर शुरू नहीं किया. नई प्रक्रिया 26 नवंबर 2025 से चालू हुई जो अब भी जारी है. इस बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक ने निर्देश दिए कि सभी एम्बुलेंस कंपनी से लेकर आरएमआरएस के जरिए चलाई जाएं.
कंपनी ने एम्बुलेंस सौंपने से किया इनकार
प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र ने आगे कहा कि विभाग ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई कि सेवा कैसे जारी रहेगी और कर्मचारियों का क्या होगा. कंपनी ने एम्बुलेंस सौंपने से इनकार कर दिया और अधिकारियों ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई.
2 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के परियोजना निदेशक ने कंपनी को चेतावनी दी कि हैंडओवर न करने पर बैंक गारंटी जब्त कर ली जाएगी. अब एम्बुलेंस विभाग के कब्जे में हैं लेकिन साफ दिशा-निर्देश न होने से वे बेकार पड़ी हैं.
ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं को खतरा
शेखावत ने चिंता जताई कि नया टेंडर कब पूरा होगा यह स्पष्ट नहीं है. तब तक सेवा बंद रहेगी और कर्मचारी बेरोजगारी झेलेंगे. यह स्थिति ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ा खतरा है जहां अस्पताल दूर हैं. सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए वरना कई जिंदगियां दांव पर लग सकती हैं.
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