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‎झालावाड़: फर्जी विकलांग बनकर 12 साल से नौकरी कर रहे दो टीचर, एक गिरफ्तार दूसरा फरार

राजस्थान के झालावाड़ में 12 साल से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है. पुलिस ने एक वरिष्ठ अध्यापक को गिरफ्तार किया है.

‎झालावाड़: फर्जी विकलांग बनकर 12 साल से नौकरी कर रहे दो टीचर, एक गिरफ्तार दूसरा फरार
झालावाड़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण से नौकरी लगने वाले 2 टीचर सामने आए हैं.

Rajasthan News: राजस्थान में सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. झालावाड़ पुलिस ने एक ऐसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिसमें पुलिस ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए 12 साल से वरिष्ठ अध्यापक की नौकरी करने वाले एक आरोपी शिक्षक बनेसिंह को गिरफ्तार किया है. यह शिक्षक वर्तमान में बकानी ब्लॉक के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में लगा हुआ था.

मेडिकल जांच में खुली पोल

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार पुलिस को लंबे समय से गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग दिव्यांगता के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवाओं में जगह बनाए हुए हैं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसओजी जयपुर की मदद से एक विशेष जांच शुरू की गई. जांच के दायरे में आए कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया और कोटा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों के बोर्ड से उनकी दोबारा मेडिकल जांच करवाई गई.

नियमों के अनुसार दिव्यांगता आरक्षण पाने के लिए संबंधित व्यक्ति का कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांग होना अनिवार्य है. लेकिन जब बोर्ड ने बकानी स्कूल के वरिष्ठ अध्यापक बनेसिंह की जांच की तो उसकी दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत पाई गई. वहीं मामले में शामिल दूसरे आरोपी शिक्षक योगेश कुमार की दिव्यांगता तो जांच में शून्य प्रतिशत निकली. इन परिणामों ने यह साफ कर दिया कि दोनों ने सरकारी सिस्टम को धोखा देकर नौकरी हासिल की थी.

कोतवाली थाने में मामला दर्ज

पुलिस ने इस मामले में कोतवाली थाने में प्रकरण संख्या 307/2026 दर्ज किया है. पुलिस ने नियुक्ति के समय पेश किए गए दस्तावेजों और चिकित्सा विभाग द्वारा जारी प्रमाण पत्रों का गहन मिलान किया है. 3 जून 2026 को पुलिस ने मुख्य आरोपी बनेसिंह को गिरफ्तार कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. मामले का दूसरा आरोपी योगेश कुमार फिलहाल फरार है और उसे पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.

पुलिस का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है. इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में अन्य गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है.

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