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This Article is From Jan 14, 2026

JJM Scam: राजस्थान के प्यासों के हक पर डाका! ACB ने कस दिया शिकंजा, PHED के इन 'बड़े साहबों' पर गिरी गाज

राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में ACB ने बड़ी कार्रवाई करते हुए PHED के तत्कालीन मुख्य अभियंता सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

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NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के नाम पर हुए भ्रष्टाचार के काले खेल का अब पर्दाफाश होने लगा है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों के ठेके बांटने के मामले में पीएचईडी (PHED) के तीन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर लिया है. अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया और सरकार की तिजोरी में सेंध लगाई.

इन अधिकारियों पर दर्ज हुई FIR

एसीबी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन बड़े चेहरों को नामजद किया है, उनमें ये अधिकारी शामिल हैं:-

  1. दिनेश गोयल: तत्कालीन मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना)
  2. महेंद्र प्रकाश सोनी: तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अजमेर), जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
  3. सिद्धार्थ टांक: अधिशासी अभियंता (परियोजना खंड, मांडल, भीलवाड़ा)

शपथ पत्र फर्जी, ठेके करोड़ों के!

एसीबी की जांच में जो खुलासा हुआ है, वह चौंकाने वाला है. जांच में सामने आया कि ठेकेदार कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी बोली क्षमता (Bidding Capacity) के शपथ पत्र तैयार किए गए. जिन कंपनियों की हैसियत काम करने की नहीं थी, उन्हें कागजों पर पात्र दिखाकर करोड़ों रुपये के वर्क ऑर्डर थमा दिए गए. अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं.

1500 करोड़ का 'कागजी' खेल

एसीबी के मुताबिक, हैदराबाद की 'भूषणम कंस्ट्रक्शन कंपनी' के अधूरे कार्यों को पूरा दिखाने के लिए झूठे हलफनामे पेश किए गए. इन अधूरे कामों की कुल लागत करीब 1493 करोड़ रुपये थी. इस घोटाले की एक बड़ी बानगी चंबल-भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना (चरण-2) के पैकेज-3 में देखने को मिली, जहां 187.33 करोड़ रुपये के काम को कागजों में 'कम्प्लीट' घोषित कर दिया गया. हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी. ग्राउंड जीरो पर जांच करने पर पता चला कि कई गांवों में अब तक कमीशनिंग और स्काडा (SCADA) तकनीक का काम शुरू ही नहीं हुआ है. 

यानी जिस पानी का इंतजार जनता कर रही थी, वह उन तक पहुंचा ही नहीं, लेकिन अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से फाइलों में पाइपलाइन बिछाकर भुगतान की तैयारी कर ली गई.

अभी कई और 'मछलियां' आएंगी हाथ!

एसीबी का साफ कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है. जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसमें पीएचईडी के कई अन्य अधिकारियों और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं. एसीबी फिलहाल इन फाइलों की गहराई से पड़ताल कर रही है कि भ्रष्टाचार की ये जड़ें कितनी गहरी हैं.

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