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जोधपुर का 400 करोड़ का रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट कछुआ चाल में, हाईटेक मशीनें लगीं फिर भी बेसमेंट तक सीमित इलाज

राजस्थान के जोधपुर में 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट अब भी अधूरा है. हाईटेक मशीनें लगने के बावजूद पूरा भवन शुरू नहीं हो पाया है और फिलहाल कैंसर मरीजों का इलाज केवल बेसमेंट में ही किया जा रहा है.

जोधपुर का 400 करोड़ का रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट कछुआ चाल में, हाईटेक मशीनें लगीं फिर भी बेसमेंट तक सीमित इलाज
राजस्थान के जोधपुर में 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट अब भी अधूरा है.

Rajasthan News: राजस्थान के दूसरे बड़े शहर जोधपुर को चिकित्सा हब के रूप में जाना जाता है. यहां लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. इसी दिशा में पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से पश्चिमी राजस्थान का पहला अत्याधुनिक रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने की घोषणा की थी.

इस संस्थान का उद्देश्य था कि कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर दिल्ली अहमदाबाद या मुंबई जैसे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े और उन्हें जोधपुर में ही आधुनिक उपचार मिल सके. इसके लिए डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन बहुमंजिला भवन का शिलान्यास किया गया था.

सरकार बदलने के बाद धीमी पड़ गई रफ्तार

सरकार बदलने के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गति काफी धीमी पड़ गई. चार मंजिला बनने वाला यह कैंसर इंस्टीट्यूट अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है. वर्तमान में इसकी सेवाएं केवल बेसमेंट तक ही सीमित हैं जबकि ग्राउंड फ्लोर सहित बाकी तीन मंजिलों का निर्माण और फिनिशिंग कार्य अभी अधूरा पड़ा है. इस वजह से मरीजों को पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

बेसमेंट में ही चल रहा इलाज

फिलहाल यहां ऑन्कोलॉजी विभाग बेसमेंट में संचालित किया जा रहा है. यहां प्रतिदिन करीब 30 से 40 कैंसर मरीजों का इलाज किया जाता है. मरीजों को कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं.

यहां मेल और फीमेल वार्ड भी बनाए गए हैं और कई अत्याधुनिक मशीनें भी स्थापित की गई हैं जिनकी लागत करोड़ों रुपये बताई जा रही है. लेकिन भवन का बाकी हिस्सा तैयार न होने के कारण इन सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है.

35 से 40 करोड़ की हाईटेक मशीनें लगीं

ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य ने बताया कि इस केंद्र में करीब 35 से 40 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक रेडिएशन मशीन स्थापित की गई है. यह राजस्थान की सबसे एडवांस मशीनों में से एक मानी जाती है. यहां रेडिएशन से जुड़े आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं और रोजाना 40 से 50 मरीजों का इलाज किया जाता है. इस मशीन से कैंसर मरीजों को काफी राहत मिल रही है.

भविष्य में बन सकता है बड़ा मेडिकल सेंटर

अधिकारियों के अनुसार इस संस्थान में आगे चलकर मेडिसिन ऑन्कोलॉजी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग भी शुरू किए जाएंगे. यदि भवन का काम पूरा हो जाता है और डॉक्टरों के पद भर दिए जाते हैं तो यह केंद्र पश्चिमी राजस्थान के लिए बड़ा मेडिकल हब बन सकता है.

मथुरादास माथुर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. संदीप अरोड़ा ने बताया कि इस परियोजना पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ग्राउंड फ्लोर का अधिकांश काम पूरा हो चुका है. फिनिशिंग के बाद इसे जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है.

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