
Kota Suicide Case: कोचिंग सिटी कोटा में छात्रों के सुसाइड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस साल अभी तक कोटा में तैयारी करने वाले 23 बच्चों ने सुसाइड किया है. बीते रविवार को भी कोटा में दो छात्रों ने सुसाइड किया. छात्रों के सुसाइड के बढ़ते मामलों को लेकर राजस्थान सरकार, कोटा प्रशासन के साथ-साथ कोटा के कोचिंग संचालक की कार्यशैली सवालों के घेरे में है. रविवार की घटना के बाद कोटा डीएम ने अगले दो महीने के लिए कोटा में सभी तरह के टेस्ट और एग्जाम पर रोक लगा दी है. साथ ही चार घंटे की पढ़ाई के साथ-साथ चार घंटे की फन क्लास लगाने के निर्देश दिए है. चार सितंबर को कोटा सुसाइड मामलों की जांच के लिए राज्यस्तरीय टीम कोटा पहुंचने वाली है.
जुर्माना और सरकार के डर बिना सुसाइड रुकना नामुकिन
कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कोचिंग संस्थानों के विस्तार पर रोक लगाने की सलाह दी है. उन्होंने मांग की है कि जिस कोचिंग संस्थान का बच्चा सुसाइड करता है उस पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उसे जमाने की राशि पीड़ित परिवार को तुरंत दी जाए. जब तक कोचिंग संस्थानों को जुर्माना या सरकार का डर नहीं रहेगा आत्महत्याओं का सिलसिला नहीं रुकेगा.
देश में कोचिंग की सबसे बड़ी मंडी बनी कोटा
उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर कोटा में कोचिंग इंडस्ट्री और हॉस्टल्स सिर्फ पैसा कमाने में लगे हैं. कोटा देश में कोचिंग की सबसे बड़ी मंडी बन गया है. विधायक भरत सिंह ने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा है कि कोचिंग संस्थानों को सभी का समर्थन मिल रहा है उनके खिलाफ सख्ती से कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
कोचिंग वालों को अफसरों के साथ-साथ मिलता नेताओं का साथ
कांग्रेस विधायक ने आगे कहा कि जो बच्चा मरता है, उसके और उसके परिवार को दर्द को आप महसूस कर नहीं सकते. भारत सिंह ने प्रशासन पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि प्रशासनिक अधिकारी अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कोटा में पोस्टिंग करवाते हैं कोचिंग संस्थानों को नेताओं का भी पूरा समर्थन हासिल है.
डमी स्कूल बंद किए जाए, 12वीं के बाद हो दाखिले
विधायक भरत सिंह ने अपने पत्र में सीएम अशोक गहलोत से मांग की है कि कोटा में देशभर से कोचिंग के लिए आने वाला बच्चा स्कूलों में डमी एडमिशन लेता है, वह स्कूल नहीं जाता. प्राइवेट स्कूल संचालक डमी स्कूल की फीस बच्चों से वसूलते हैं जबकि होना यह चाहिए कि कोचिंग संस्थानों में उन्हें बच्चों को एडमिशन दिया जाए जो 12वीं क्लास पास करने के बाद मेडिकल वह इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग लेना चाहते हैं.
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