राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)
NDTV CSDS Rajasthan Election Opinion Poll: राजस्थान में विधानसभा चुनाव दहलीज पर हैं. 25 नवंबर को राज्य की 200 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी तक सीएम के चेहरे की घोषणा नहीं की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजस्थान दौरे के दौरान दिए भाषण में ये साफ किया था कि इस बार बीजेपी सीएम का चेहरा घोषित नहीं करेगी. ऐसे में 'कमल' का फूल ही कैंडिडेट होगा और यही सीएम का चेहरा भी होगा. पीएम मोदी के इस बयान से राजस्थान की राजनैतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ गई. गांव हो या शहर, हर जगह यही सवाल लोगों के जहन में घुम रहा है कि अगर बीजेपी चुनाव जीती तो सीएम कौन बनेगा? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए NDTV CSDS ने ओपिनियन पोल किया है, जिसमें जनता से पूछा गया है कि वे किसे सीएम बनते देखना चाहते हैं.
बीजेपी से सीएम चेहरा कौन?
ये सर्वे 24 अक्टूबर से 30 अक्टूबर के बीच किया गया है, जिसमें हर समुदाय, जाति, वर्ग के लोगों से बातचीत की गई है. राजस्थान की 200 में से 30 विधानसभा सीटों पर किए गए इस सर्वे में कुल 3032 लोगों से बातचीत की गई है. सर्वे के दौरान जब जनता से पूछा गया कि आप बीजेपी से किसे सीएम बनता देखना चाहते हैं? तो कई जवाब समाने आए. लोगों ने जो जवाब दिए उसमें वसुंधरा राजे की डिमांड सबसे ज्यादा है. 27 प्रतिशत लोगों ने वसुंधरा राजे को बीजेपी का सीएम चेहरा माना है. जनता की पसंदीदा सीएम की लिस्ट में 13 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे नंबर बाबा बालक नाथ का नाम है. जबकि गजेंद्र सिंह शेखावत 6 प्रतिशत मत के साथ तीसरे नंबर पर हैं. वहीं 3 प्रतिशत लोगों ने सीपी जोशी को सीएम का चेहरा बताया है.

गांव-शहर में किसका पलड़ा भारी?
सर्वे में 15 प्रतिशत लोगों ने ऊपर बताए गए चार नामों में से किसी को भी सीएम चेहरा नहीं माना. उनके अनुसार, बीजेपी से किसी और को सीएम चेहरा बनाया जाना चाहिए. इस दौरान 5 प्रतिशत लोगों ने अन्य उम्मीदवारों को सीएम चेहरा बताया. सर्वे में ये भी खुलासा हुआ है कि गांव-शहर में किस पार्टी का पलड़ा भारी है? ओपिनियन पोल के अनुसार, गांव की 44 प्रतिशत जनता बीजेपी की साथ है, जबकि 38 प्रतिशत लोग कांग्रेस के साथ हैं. वहीं शेष 18 प्रतिशत अन्य पार्टियों के साथ हैं. इसी तरह शहर की 43 प्रतिशत जनता का भरोसा बीजेपी पर है, जबकि 45 प्रतिशत जनता कांग्रेस के साथ है. वहीं शेष 12 प्रतिशत लोगों ने अन्य पार्टियों पर भरोसा जताया है.