
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी- NGT) ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना निगम लिमिटेड (ईआरसीपीसीएल- ERCPCL) को पर्यावरण मंजूरी प्राप्त किए बिना टोंक जिले के बीसलपुर बांध से गाद निकालने, ड्रेजिंग, खनिज निष्कर्षण और निपटान करने से रोक दिया है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने शुक्रवार को दिये एक आदेश में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन के मामले में आवश्यक निवारक, निषेधात्मक, दंडात्मक और उपचारात्मक उपाय करने का भी निर्देश दिया.
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य अफ़रोज़ अहमद की पीठ का यह आदेश जोधपुर निवासी दिनेश बोथरा की याचिका पर आया, जिसमें बीसलपुर बांध पर 20 साल की अवधि के लिए रेत खनन के अनुबंध की निविदा को चुनौती दी गई थी.
अधिकरण ने अपने आदेश में, परियोजना के तहत ड्रेजिंग, बांध से गाद निकालने, रेत या बजरी निकालने से जुड़ी सभी गतिविधियों पर तब तक रोक लगा दी है, जब तक कि 2006 के पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना के अनुसार आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त नहीं हो जाती.
याचिकाकर्ता के वकील संजीत पुरोहित ने कहा कि बोली 2016 के सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देशों और 2020 के रेत खनन के लिए प्रवर्तन और निगरानी दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है. एनजीटी ने कहा कि खनन कार्यों के माध्यम से खनिज निष्कर्षण की आड़ में गाद निकालने या ड्रेजिंग गतिविधियां पर्यावरण कानूनों के पालन के बिना आगे नहीं बढ़ सकती हैं.
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