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RPSC RAS Exam की OMR शीट में की थी छेड़छाड़, आयोग ने शातिर अभ्यर्थी को 2 साल के लिए किया डिबार

RPSC RAS ​​Exam: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) RAS परीक्षा की ओएमआर शीट में छेड़छाड़ करने वाले एक शातिर अभ्यर्थी को 2 साल के लिए डिबार कर दिया है. अब वह कैंडिडेंट दो साल तक किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएगा.

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RPSC RAS Exam की OMR शीट में की थी छेड़छाड़, आयोग ने शातिर अभ्यर्थी को 2 साल के लिए किया डिबार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

RPSC RAS ​​Exam: भर्ती परीक्षाओं के ओएमआर शीट में छेड़छाड़ करना कितना महंगा पड़ सकता है, इसका एक उदाहरण राजस्थान से सामने आया है. जहां राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने RAS परीक्षा की OMR शीट की कार्बन कॉपी में छेड़छाड़ करने वाले अभ्यर्थी को दो साल के लिए डिबार कर दिया है. अब वह कैंडिडेंट दो साल तक किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएगा. मिली जानकारी के अनुसार अभ्यर्थी ने ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी में छेडछाड़ कर न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए थे. आयोग ने जाँच कर अभ्यर्थी को 2 साल के लिए डिबार कर दिया है. 

आयोग ने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आरएएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2023 के 1 अभ्यर्थी को 2 वर्षों के लिए आयोग द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किया गया है. आयोग सचिव रामनिवास मेहता द्वारा इस संबंध में 30 अप्रेल 2024 को आदेश जारी किए गए. आयोग सचिव ने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आरएएस (प्रारंभिक) परीक्षा-2023 का आयोजन 1 अक्टूबर 2023 को किया गया. इस परीक्षा का परिणाम 20 अक्टूबर 2023 को घोषित किया गया.

आयोग ने बताया कि झुंझुनू जिले के अजाड़ी खुर्द गांव निवासी अभ्यर्थी दीपक जोशी द्वारा इस परीक्षा में प्रश्न-पत्र के कुल 150 प्रश्नों में से 55 प्रश्नों में किसी भी विकल्प का चयन नहीं किया गया था. 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प का चयन नहीं किए जाने के कारण परीक्षा परिणाम में अभ्यर्थी को अयोग्य घोषित किया गया था. अभ्यर्थी ने स्वयं की  खाली ओएमआर शीट में भरकर जालसाजी की थी. 

अयोग्य घोषित किए जाने पर अभ्यर्थी ने स्वयं के पास उपलब्ध ओएमआर शीट की प्रतिलिपि में खाली छोड़े गए 55 प्रश्नों के विकल्पों में से 49 प्रश्नों के विकल्पों को भरकर फर्जी बाडा करते हुए माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की.



अभ्यर्थी और RPSC की OMR शीट जांच करने पर हुआ खुलासा 

अभ्यर्थी दीपक जोशी द्वारा माननीय न्यायालय में प्रस्तुत ओएमआर शीट की प्रतिलिपि का मिलान आयोग कार्यालय में उपलब्ध अभ्यर्थी की मूल ओएमआर शीट से किये जाने पर स्पष्ट हुआ कि अभ्यर्थी द्वारा खाली छोड़े गए प्रश्नों के विकल्पों को जानबूझकर ओएमआर शीट की कार्बन प्रतिलिपि में बाद में भरा गया है.


कारनामा सामने आने पर अभ्यर्थी ने याचिका ली वापस 

आयोग द्वारा प्रकरण में तथ्यात्मक रिपोर्ट माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने पर कारगुजारी उजागर होते देख अभ्यर्थी द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष याचिका वापस लेने के लिए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया. इस पर माननीय न्यायालय द्वारा  23 जनवरी 2024 को याचिकाकर्ता द्वारा याचिका को विदड्रा किए जाने के कारण खारिज कर दिया गया. ओएमआर शीट की कार्बन प्रति में किसी भी प्रकार की छेडछाड आयोग के रिकार्ड से छेडछाड़ की श्रेणी के अन्तर्गत आता है.

इसके उपरांत आयोग द्वारा प्रकरण में दीपक जोशी को व्यक्ति सुनवाई के लिए 15 मार्च 2024 को बुलाया गया. व्यक्तिगत सुनवाई एवं प्रकट तथ्यों के आधार पर यह पाया गया कि अभ्यर्थी द्वारा पूर्व में खाली छोड़े गए 55 प्रश्नों में से 49 प्रश्नों के विकल्प को ओएमआर शीट की कार्बन प्रतिलिपि जो स्वयं अभ्यर्थी के पास थी, को जालसाजी कर भर दिया गया. इस प्रकार का कृत्य अनुचित साधन अपनाये जाने की श्रेणी में आता है.

आयोग के निर्णयानुसार अभ्यर्थी को ''टेम्परिंग विद हिज ऑन आंसर बुक  (Tampering with his own Answer Book)'' कृत्य का दोषी माना गया है. इस अनुसार अभ्यर्थी द्वारा दी गई परीक्षा को निरस्त करते हुए आयोग द्वारा आगामी 2 वर्षों में आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं से अभ्यर्थी को डिबार किया गया है.

चयन प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखी जाती ओएमआर शीट की कार्बन प्रति

आयोग सचिव ने बताया कि आयोग द्वारा 24 अगस्त 2023 को जारी की गई सूचना अनुसार अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्ति पर पूरी ओएमआर शीट वीक्षक को सौंपनी होती है. वीक्षक इसकी मूल प्रति को स्वयं के पास जमा कर कार्बन प्रति को सावधानीपूर्वक अलग करते हुए परीक्षार्थी को देते हैं. इस कार्बन प्रति को परीक्षार्थी अपने साथ ले जाता है. चयन प्रक्रिया पूर्ण होने तक परीक्षार्थी को इस कार्बन प्रति को सुरक्षित रखना एवं आयोग द्वारा मांगने पर प्रस्तुत करना होता है.

उल्लेखनीय है कि आयोग द्वारा उक्त परीक्षा में 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प का चयन न करने वाले 1920 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया था. आयोग द्वारा इस परीक्षा से ही वस्तुनिष्ठ भर्ती परीक्षाओं में प्रत्येक प्रश्न का पांचवा विकल्प देने की शुरुआत की गई थी. इसमें यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहे तो उसे पांचवें विकल्प ''अनुतरित प्रश्न'' का चयन कर ओएमआर शीट पर गोले को भरना होता है.  

किसी भी विकल्प का चयन न करने पर प्रश्न अंक का 1/3 भाग काटने तथा 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प का चयन न करने पर अभ्यर्थी को संबंधित परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित किए जाने का प्रावधान भी आयोग द्वारा किया गया है. इस संबंध में आयोग द्वारा निरंतर अभ्यर्थियों को समय-समय पर सूचित भी किया जाता रहा है.

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