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2 से अधिक बच्चों को चुनाव लड़ने की इजाजत पर सियासत तेज, विपक्ष ने कहा- यह धीरेंद्र शास्त्री का एजेंडा

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले भजनलाल शर्मा ने एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक चल दिया है. भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में चुनाव लड़ने के लिए 2 बच्चों की बाध्यता को ख़त्म कर दिया है.

2 से अधिक बच्चों को चुनाव लड़ने की इजाजत पर सियासत तेज, विपक्ष ने कहा- यह धीरेंद्र शास्त्री का एजेंडा

Rajasthan News: राजस्थान में 30 साल पुराना प्रावधान अब इतिहास बनने जा रहा है. दो से ज्यादा संतान वाले नेता जी भी अब पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे. कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है. कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने इसकी जानकारी दी. लेकिन इस फैसले पर सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने इसे RSS और धीरेंद्र शास्त्री जैसे बाबाओं के दबाव में लिया गया फ़ैसला बताया है.

बता दें, हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री राजस्थान पहुंचे थे. पुष्कर में अपने आयोजन के दौरान शास्त्री ने हिंदुओं के ज्यादा बच्चा करने के लिए कहा था. इस बयान को लेकर भी खूब बवाल हुआ था.

सरकार ने कहा परिस्थितियां बदल चुकी है

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले भजनलाल शर्मा ने एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक चल दिया है. भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में चुनाव लड़ने के लिए 2 बच्चों की बाध्यता को ख़त्म कर दिया है. यानी अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी पंचायत और निकाय चुनाव लड़ सकेंगे. कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि जब 1995 में यह प्रावधान लागू किया गया था, तब जनसंख्या नियंत्रण इसका उद्देश्य था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. दोनों संशोधन बिल इसी सत्र में पारित किए जाएंगे.

भैरोंसिंह शेखावत की सरकार ने किया था लागू

यह नियम 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के दौरान लागू किया गया था. उस समय दो से ज्यादा संतान वाले व्यक्तियों को पंचायतीराज और नगरपालिका चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया था. करीब तीन दशक बाद इस प्रावधान को हटाने का फैसला लिया गया है. माना जा रहा है कि इससे स्थानीय स्तर की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा और ऐसे कई नेताओं को मौका मिलेगा, जो अब तक तीन संतान होने के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे.

सरकार परिवार नियोजन जैसे गंभीर विषय पर राजनीति कर रही

हालांकि, इस फैसले पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार आम जनता के मुद्दों से भटककर एजेंडा सेट करने में लगी है, और परिवार नियोजन जैसे गंभीर विषय पर राजनीति कर रही है. उन्होंने इसे मोहन भागवत और धीरेंद्र शास्त्री का एजेंडा सेट करने वाला फैसला बताया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि आम आदमी परिवार नियोजन को लेकर जागरूक है. सरकार का फैसला संघ के दबाव और चुनावी माइलेज के लिए लिया गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंचायत और निकाय चुनाव पूरी तैयारी के साथ लड़ेगी.

सरकार ने फैसला ले लिया है. अब सवाल यही है कि क्या यह फैसला सामाजिक बदलाव के नाम पर लिया गया है या इसके पीछे सियासी गणित काम कर रहा है. आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव में इसका असर साफ दिखाई देगा.

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