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चन्द्रभान सिंह आक्या ने नरपत सिंह को दी सीधी चुनौती, बोले, 'कार्यकर्ताओं को फोन पर मिल रही धमकी'

चन्द्रभान सिंह आक्या 2013 में पहली बार चित्तौड़गढ़ से चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को हराया. 2018 के विधानसभा चुनाव में आक्या ने दूसरी बार सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को हराया. लेकिन बीजेपी ने उन्हें इस बार टिकट नहीं दिया. इस कारण उनके समर्थकों का विरोध अनवरत जारी है.

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चन्द्रभान सिंह आक्या ने नरपत सिंह को दी सीधी चुनौती, बोले, 'कार्यकर्ताओं को फोन पर मिल रही धमकी'
चन्द्रभान सिंह आक्या (दाएं), नरपत सिंह राजवी (बाएं)
चित्तौड़गढ़:

Rajasthan Elections 2023 (चित्तौड़गढ़): भाजपा की दूसरी सूची में चित्तौड़गढ़ सीट पर नरपत सिंह राजवी को टिकट मिलने के बाद मौजूदा भाजपा विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या के समर्थकों का विरोध जारी हैं. आक्या के समर्थन में हुए प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन में चन्द्रभान सिंह आक्या ने खुले मंच से भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी को सीधे तौर पर चुनौती दी हैं.

उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं को फोन कर धमकी दी जा रही है. आगे उन्होंने कहा कि मेवाड़ का खून जब गर्म होता हैं तो क्या होता हैं, वह किसी से छिपा नही हैं. इस सम्मेलन में 4 दर्जन से अधिक विभिन्न समाज के और संगठन के पदाधिकारी की मौजूदगी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.

चित्तौड़गढ़ सीट से चन्द्रभान सिंह आक्या को भाजपा से टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों का विरोध लगातार जारी हैं. इस सबके बीच चन्द्रभान का कहना है कि वो 6 नवम्बर को दो पर्चा दाखिल करेंगे, जिनमें एक भाजपा से और एक निर्दलीय पर्चा शामिल होगा

दो पर्चा दाखिल करेंगे चंद्रभान सिंह आक्या 

चन्द्रभान सिंह आक्या 6 नवम्बर को दो पर्चा दाखिल करेंगे, जिनमें एक भाजपा से और एक निर्दलीय पर्चा शामिल होगा. यदि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देती हैं तो आक्या भाजपा के बागी उम्मीदवार होकर चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे.आगामी 6 नवम्बर को आक्या पर्चा दाखिल करने बड़ी संख्या में समर्थक चित्तौड़ पहुंचेंगे. इधर चित्तौड़गढ़ सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी ने एक दिन पूर्व हुई प्रेस वार्ता में कहा था कि उनका मुकाबला कांग्रेस से होगा ना कि किसी निर्दलीय प्रत्याशी से.

नरपत राजवी के चुनावी सफर पर एक नज़र

नरपत सिंह राजवी का चित्तौड़गढ़ सीट पर लम्बे समय से जुड़ाव रहा हैं. सबसे पहले 1993 में नरपत सिंह चुनाव लड़े और जीते, इसके बाद 1998 में नरपत सिंह राजवी कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत से चुनाव हार गए थे. 2003 में नरपत सिंह राजवी ने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को हराकर फिर से विधायक चुने गए और चिकित्सा मंत्री बने थे. अब भाजपा ने 2023 में फिर से चित्तौड़गढ़ सीट पर उन्हें टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा हैं.

पिछले 10 दिन में चन्द्रभान सिंह आक्या के समर्थन में 5 सम्मलेन आयोजित हो चुके हैं. आक्या ने कहा कि उन्हें शीर्ष आलाकमान पर अब भी विश्वास है कि उन्हें भाजपा से टिकट मिलेगा वरना वो निर्दलीय पर्चा दाखिल करेंगे.

चन्द्रभान सिंह आक्या के चुनावी सफर पर एक नज़र

चन्द्रभान सिंह आक्या 2013 में पहली बार चित्तौगढ़ से चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को हराया. फिर 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फिर से आक्या को उम्मीदवार उतारा और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को दूसरी बार हराया,लेकिन बीजेपी ने उन्हें इस बार टिकट नहीं दिया, जिसका आक्या और उनके समर्थक विरोध कर रहे हैं.

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