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Rajasthan Lok Sabha Results 2024: राजस्थान में कांग्रेस की जीत के 5 बड़े कारण, मात्र 7 महीने में कैसे बदल गया वोटरों का मूड

Rajasthan Lok Sabha Results 2024: राजस्थान में कांग्रेस ने अपना खोया हुआ सम्मान वापस हासिल कर लिया है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के मात्र 7 महीने के बाद ही कांग्रेस ने राजस्थान में लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया है. आइए जानते हैं कांग्रेस के इस प्रदर्शन की 5 बड़ी वजहें.

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Rajasthan Lok Sabha Results 2024: राजस्थान में कांग्रेस की जीत के 5 बड़े कारण, मात्र 7 महीने में कैसे बदल गया वोटरों का मूड
Lok Sabha Result 2024: जनसभा में कांग्रेस नेताओं के साथ मंच पर थिरकते पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा.

Rajasthan Lok Sabha Results 2024: 10 साल बाद कांग्रेस ने राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी की है. कांग्रेस राजस्थान की 11 सीटों पर आगे चल रही हैं. जबकि भाजपा 14 सीटों पर आगे चल रही है. बीते दो चुनाव 2019 और 2014 में राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था. लेकिन इस बार कांग्रेस ने एग्जिट पोल की भविष्यवाणी को झूठलाते हुए राजस्थान में भाजपा को कड़ी टक्कर दी. राजस्थान में कांग्रेस की जीत से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर है. जगह-जगह कांग्रेस कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं. कांग्रेस की जीत से राजस्थान के सियासी समीकरण बदल सकता है. प्रदेश सरकार में भी बदलाव की चर्चा है. लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच लोग यह जानने को उस्तुक है कि आखिर वो क्या कारण रहे जिससे कांग्रेस राजस्थान में इतना अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रही. 

राजस्थान की किस सीट पर कौन जीता कौन हारा

अभी तक घोषित नतीजों के अनुसार राजस्थान की जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, उदयपुर, जालोर, बीकानेर, अजमेर, चित्तौड़गढ़ और पाली लोकसभा सीट पर बीजेपी जीत गई है. जबकि बाड़मेर, चूरू, भरतपुर, टोंक सवाईमाधोपुर, सीकर, नागौर, श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने जीत हासिल की है. सीकर लोकसभा सीट पर लेफ्ट के अमरा राम चुनाव जीत चुके हैं. इसके अलावा नागौर में हनुमान बेनीवाल और बासंवाड़ा में आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत चुनाव जीत चुके हैं. 

राजस्थान में कांग्रेस की जीत के कारणों पर हमने प्रदेश के सियासी जानकारों ने चर्चा की. जिसमें उन्होंने कांग्रेस की जीत के कई बड़े कारण बताए. आइए जानते हैं राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बड़े कारण. 

1. राजस्थान में कांग्रेस को मिला गठबंधन का लाभ

राजस्थान में कांग्रेस को गठबंधन का लाभ मिला है. प्रत्याशियों की घोषणा के समय कांग्रेस ने काफी माथापच्ची कर लेफ्ट, रालोद और भारत आदिवासी पार्टी से गठबंधन किया था. कांग्रेस ने इन तीनों पार्टियों के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे. लेफ्ट तो राष्ट्रीय राजनीति में भी कांग्रेस के साथ रहती है. लेकिन बीते दो चुनाव से एनडीए के साथी रहे हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोद को इस बार कांग्रेस अपने खेमे में लेने में सफल रही. इसके साथ-साथ आदिवासी बहुल्य वाले बांसवाड़ा में अच्छा दमखम रखने वाले भारत आदिवासी पार्टी को भी कांग्रेस अपने खेमे में लेने में सफल रही. इसका फायदा नागौर, बांसवाड़ा, बाड़मेर के साथ-साथ अन्य सीटों पर भी कांग्रेस को मिली. गंगानगर में कुलदीप इंदौरा की जीत में लेफ्ट वोटरों का बड़ी भूमिका बताई जा रही है. 

2. संविधान और आरक्षण खत्म करने की बात

राजस्थान में पहले दो चरणों में मतदान हुए थे. चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अबकी पार 400 पार का नारा दिया था. इसे कांग्रेस ने संविधान और आरक्षण बदलने से मुद्दें से जोड़ा. कांग्रेस लोगों तक यह बात पहुंचाने में सफल रही कि भाजपा यदि इस बार बड़ी जीत हासिल की तो वह संविधान बदल देगी. आरक्षण खत्म कर देगी. इसका फायदा कांग्रेस को मिला. कांग्रेस आरक्षित सीटों पर जीतने में सफल रही. अबकी पार 400 पार के नारे को आरक्षण खत्म करने से जोड़ने से बात जबतक भाजपा समझती तब तक राजस्थान की 12 सीटों पर चुनाव हो चुका था. दूसरे चरण के मतदान से पहले पीएम मोदी सहित  अन्य भाजपा नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करने की बात की. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. 

3. गोविंद सिंह डोटासरा बड़ा फैक्टर बनकर उभरे

राजस्थान में कांग्रेस की बड़ी जीत के पीछे गोविंद सिंह डोटासरा एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरे. राजस्तान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा न केवल अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर रखने में सफल रहे. बल्कि उन्होंने चुनाव प्रचार में भी जमकर मेहनत की. गहलोत-पायलट विवाद को भी डोटासरा ने खत्म करवाया. इसके अलावा प्रत्याशियों के चयन, गठबंधन सहित अन्य फैसलों में भी चुनाव प्रभारी  सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ मिलकर डोटासरा ने सही निर्णय लिए. जिसका कांग्रेस को फायदा मिला. 


4. स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ने का फैसला 

राजस्थान की अलग-अलग लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा चुनावी माहौल तैयार करने की कोशिश की. इसमें कांग्रेस सफल भी रही. कांग्रेस ने राष्ट्रीय मुद्दों के अधिक स्थानीय मुद्दों पर वोटरों को रिझाया. भरतपुर में खनन का मुद्दा, पूर्वी राजस्थान ईआरसीपी का मुद्दे के साथ-साथ पार्टी ने अन्य सीटों पर स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा तवज्जो दी. जिसका लाभ उन्हें मिला. 

5. पायलट खेमे और नए चेहरों पर भरोसा

राजस्थान में इस बार कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन में काफी सोच-समझ के फैसले लिए. पार्टी ने कई ऐसे प्रत्याशी उतारे, जो बिल्कुल अप्रत्याशित थे. भरतपुर से सांसद बनीं संजना जाटव, जयपुर ग्रामीण से अनिल चोपड़ा, दौसा से मुरारी लाल मीणा, टोंक से हरीशचंद्र मीणा शामिल हैं. इन नेताओं को टिकट मिलने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश गया कि पार्टी जुझारु कार्यकर्ताओं को मौका देती है. सचिन पायलट ने भी इन सीटों पर जमकर पसीना बहाया. नतीजा कांग्रेस पूरे प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही. 



राजस्थान में मात्र 7 महीने में ही बदला वोटरों को मूड

राजस्थान में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि 7 महीने पहले कांग्रेस को राजस्थान में विधानसभा चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी. ऐसे में राजस्थान में मात्र 7 महीने में ही वोटरों को मूड बदल गया. अब राजस्थान के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद यह संभव है कि प्रदेश की भजनलाल सरकार में बड़े बदलाव हो. चर्चा इस बात की भी है कि राजस्थान में भाजपा सीएम फेस बदल सकती है. 

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