Rajasthan News: राजस्थान में पेपर लीक कांड ने अब सियासी जंग का रूप ले लिया है. बांसवाड़ा-डूंगरपुर से BAP सांसद राजकुमार रोत ने BJP और कांग्रेस दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि इस मामले में असली गुनहगारों को छोड़कर सिर्फ एक आदिवासी अधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है जिससे पूरे समुदाय की इज्जत पर बट्टा लग रहा है.
रोत ने सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' वाली नीति को खोखला बताते हुए निष्पक्ष जांच की जोरदार मांग की. उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बेनकाब किया जाए.
आदिवासी समाज की छवि पर हमला
सांसद रोत ने बाबूलाल कटारा का जिक्र करते हुए बताया कि ED के प्रेस नोट और खबरों में बार-बार इस अधिकारी का नाम उछालकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे पूरा भ्रष्टाचार उसी ने किया हो. इससे आदिवासी इलाकों और समाज की बदनामी हो रही है.
रोत ने स्पष्ट किया कि कटारा गलत है और जेल की सलाखों के पीछे है लेकिन सवाल यह है कि उसकी नियुक्ति किसके कहने पर हुई? जांच के दौरान उसने किन नेताओं के नाम लिए? इन बातों पर चुप्पी क्यों बरती जा रही है? रोत का आरोप है कि यह सब सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगता है.
डबल इंजन सरकार की भूमिका
राजकुमार रोत ने मौजूदा BJP सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस की सत्ता थी तब BJP ने पेपर लीक और भ्रष्टाचार को चुनावी हथियार बनाया था. लेकिन अब केंद्र और राज्य दोनों जगह BJP की सरकार होने के बावजूद बड़े-बड़े नामों का पर्दाफाश नहीं हो रहा.
रोत ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी को बलि का बकरा बनाकर असली अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है. SOG की जांच और ED के बयानों में कई नेताओं के नाम उभरे हैं फिर भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में क्यों? सांसद ने साफ कहा कि यह न सिर्फ भ्रष्टाचार की कहानी है बल्कि जनता के भरोसे और पारदर्शिता पर सवाल है.
युवाओं का भविष्य दांव पर, वोट से मिलेगा जवाब
सांसद रोत ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने युवाओं को सच नहीं बताया तो आने वाले चुनावों में जनता मतपेटी से हिसाब चुकता करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों.
यह भी पढ़ें- राजस्थान में 20 लाख पेंशन रुकने पर मंत्री की सफाई, कहा- सत्यापन के बाद शुरू होगा... ऐप से घर बैठे कराएं