देश के अलग-अलग राज्यों से निकलने वाली बसों और ट्रेनों का बड़ा जंक्शन अजमेर, अंतरराज्यीय चोर गिरोह के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया था. यहां शातिर चोर यात्रियों की भीड़, रात का अंधेरा और लंबे सफर का फायदा उठाकर मंसूबों को अंजाम दे रहे थे. लेकिन, अब पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 लोगों की गिरफ्तारी की. इन आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जांच में सामने आया कि गिरोह खासतौर पर परिवारों और लंबी दूरी के यात्रियों को निशाना बनाता था. ताकि उनके पास सोने-चांदी के जेवर और नकदी होने की संभावना अधिक रहती है.
यात्रियों को नींद आते ही वारदात को अंजाम
गिरोह के सदस्य सफर के दौरान खुद को सहयात्री बताकर यात्रियों से दोस्ती करते थे. कोई बच्चों की तारीफ करता तो कोई सफर की थकान पर बात करता. धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया जाता और फिर मौका देखकर बैग या सूटकेस पर हाथ साफ कर दिया जाता. एक आरोपी यात्रियों को बातचीत में उलझाए रखता, दूसरा बैग की चेन खोलकर जेवरात निकाल लेता. जब तक यात्री को शक होता, बस या ट्रेन कई किलोमीटर आगे बढ़ चुकी होती थी. इसी तरह से वारदात का यह सिलसिला लंबे वक्त से चला आ रहा था.
मेरठ से जुड़े साजिश के तार
जांच अधिकारी एएसआई चांद सिंह के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड मेरठ निवासी असलम था, जो पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था. असलम आमतौर पर चोरी का माल लेकर बीच रास्ते में उतर जाता. ताकि सीधे वारदात स्थल से उसका नाम न जुड़े. बाकी आरोपी आगे का सफर पूरा कर लेते और बाद में तय स्थान पर एकत्र होकर चोरी के माल का बंटवारा करते. चोरी किए गए सोने-चांदी को ठिकाने लगाने के लिए बिचौलिया अकबर की भूमिका अहम थी, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
500 कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद खुलासा
इस गिरोह तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था. शहर में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी. अलग-अलग राज्यों में मुखबिर तंत्र सक्रिय किया गया, तब जाकर आरोपियों की कड़ियां जुड़ सकीं. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई राज्यों में चोरी की वारदातों का खुलासा हुआ है. अब पुलिस का फोकस चोरी गए माल की बरामदगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों तक पहुंचने पर है, ताकि सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके.