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आदिवासियों के गढ़ प्रतापगढ़ में दांव पर लगी कई दिग्गजों की साख, रोचक हो सकता है नतीजा

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजे रोचक रह सकते हैं. जिले में इस बार मुख्य रूप से तीन पार्टियां मैदान में रही हैं- कांग्रेस- भाजपा और भारत आदिवासी पार्टी, इन तीनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है.

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आदिवासियों के गढ़ प्रतापगढ़ में दांव पर लगी कई दिग्गजों की साख, रोचक हो सकता है नतीजा
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रतापगढ़:

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव का मतदान 25 नवंबर 2023 को हो चुका है. अब नतीजों का इतंजार है. काउंटिंग तीन दिसंबर को होनी है. इससे पहले संभावित नतीजों पर कयासबाजी जारी है. कयासबाजी में जनजाति अंचल कहे जाने वाले प्रतापगढ़ जिले से जो बातें छनकर आ रही है, उसके अनुसार यहां इस बार के नतीजे रोचक रह सकता है.

जिले में इस बार मुख्य रूप से तीन पार्टियां मैदान में रही हैं. जिस कारण से मतदान अधिक किसको हुआ है यह कहना मुश्किल होता जा रहा है. इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी का समीकरण भारत आदिवासी पार्टी ने पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. इस बार भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशियों को ग्रामीण क्षेत्र में भारी समर्थन मिला है. जिले की दोनों सीटों में यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता की कौन जीत रहा है. 

प्रतापगढ़ जिले में इस बार 82.12 प्रतिशत मतदान हुआ है. पिछले चुनाव से मतदान प्रतिशन में इस बार 2.09 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. सबसे अधिक जिले की प्रतापगढ़ विधानसभा सीट पर 83.77 प्रतिशत रहा. वहीं प्रतापगढ़ जिले की धरियावद विधानसभा सीट पर 80.47 प्रतिशत रहा.  

दांव पर लगी साख

प्रतापगढ़ जिले में इस बार विधानसभा चुनाव में कई नेता हैं जिनकी साख दांव पर लगी हुई है. कांग्रेस के विधायक व प्रत्याशी रामलाल मीणा व भाजपा से पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा व उनके पुत्र हेमंत मीणा इस बार भाजपा प्रत्याशी भी है. दोनों की साख दांव पर लगी हुई है. अब देखना है कि जनता ने किसका साथ दिया है और किसका साथ छोड़ा है.

आदिवासी समाज का बड़ा वोट बैंक

प्रतापगढ़ जिले की दोनों विधानसभा सीट पर जनता के लिए तीसरे विकल्प के तौर पर भारत आदिवासी पार्टी मैदान में थी. इस पार्टी के साथ आदिवासी समाज का बड़ा वोट बैंक है, जिले की प्रतापगढ़ व धरियावद सीट पर इस पार्टी के प्रत्याशियों को अच्छा समर्थन मिला है. बहरहाल तीन दिसंबर को ही पता चलेगा कि जनता ने किस पार्टी को कितना साथ दिया है या साथ नही दिया है.

इस बार प्रतापगढ़ जिले में बीएपी ने आदिवासी समाज के वोटों को साधने की कोशिश की है. चुनाव परिणाम 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. सभी प्रत्याशी अपने-अपने जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन चुनाव परिणाम ही बताएगा कि जनता ने किस पार्टी को अपना समर्थन दिया है.

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