
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को दौसा में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ERCP के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार की राजनीति के चलते पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की जनता पानी की समस्या को लेकर त्रस्त है, लेकिन वह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे नहीं बढ़ा पाई. पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में राज्य की कुल आबादी के 40 फीसदी लोग रहते हैं.
ERCP के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा की 2004 से 2014 तक केंद्र में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार के समय भी ईआरसीपी के मुद्दे पर कोई काम नहीं हुआ. वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ERCP पर दोबारा काम शुरू हुआ. वर्ष 2016 में वसुंधरा राजे सरकार ने ईआरसीपी की परिकल्पना के विषय में विचार किया और वर्ष 2017 में वाप्कोस को डिजाइन बनाने के लिए दिया, लेकिन राजस्थान ने तय मानक 75 फीसदी के बजाय 50 फीसदी निर्भरता पर बनाया गया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली.
ERCP के मुद्दे पर संयुक्त मोर्चा ने दिया ज्ञापन
केंद्रीय मंत्री शेखावत जब दौसा पहुचें तो वहां ERCP संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने नारेबाजी कर उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया. जिस पर पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया. इसके बाद मंत्री के वापस लौटते समय मोर्चा के पदाधिकारियो ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग कर एक ज्ञापन सौंपा. वहीं, केंद्रीय मंत्री ने परियोजना की डीपीआर में राज्य की गहलोत सरकार की कमियां गिनाईं.