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This Article is From Sep 27, 2024

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के रिजल्ट पर लगी रोक, हाईकोर्ट ने कहा 'यह स्थिति देश के आम चुनाव से भी बुरी'

Delhi University Students Union Election 2024: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव की वोटिंग 27 सितंबर को हुई लेकिन इसके रिजल्ट पर अब रोक लगा दी गई है. इस दौरान कोर्ट ने स्टूडेंट कैंडिडेट्स को लेकर बड़ी बात कही है.  

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के रिजल्ट पर लगी रोक, हाईकोर्ट ने कहा 'यह स्थिति देश के आम चुनाव से भी बुरी'
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव की प्रतीकात्नक तस्वीर

DUSU Election 2024: दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा होते ही पूरे देश की नजर इस पर टिकी होती है. आए दिन छात्रसंघ चुनाव को लेकर नई-नई खबरें सामने आती रहती हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार का चुनाव बेहद खास हुआ. दरअसल 27 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले यानी 26 सितंबर को कोर्ट का एक फैसला आया. जिसने स्टूडेंट समेत सभी प्रत्याशियों को भी हैरान कर दिया. कोर्ट का यह फैसला प्रत्याशियों द्वारा प्रचार के दौरान लगाए गए पोस्टर बैनर और खर्च किए जा रहे पैसे को लेकर आया है. कोर्ट ने वोटिंग पर तो नहीं लेकिन रिजल्ट पर रोक लगा दिया है. बैनर-पोस्टर से पटे दिल्ली की सफाई के बाद सारा खर्चा प्रत्याशियों को भी उठाना पड़ेगा.

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छात्रसंघ चुनाव बना शक्ति प्रदर्शन का केन्द्र

बता दें कि लिंगदोह कमेटी के अनुसार सिर्फ 5 हजार खर्च करने की इजाजत है और पोस्टर हाथ के बने हुए होने चहिए. हालांकि स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन में इसका उल्टा असर देखने को मिलता है. छात्र राजनीति में बाहुबल का प्रयोग किया जाता है, महंगी-महंगी गाड़ियों के काफिले नजर आते हैं. इसका प्रभाव उन छात्रों पर पड़ता है जो सामान्य वर्ग से आते हैं और वह भी छात्र राजनीति के जरिए अपनी भावी राजनीतिक पारी की शुरुआत करना चाहते हैं.

कोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार

कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में हो रहे छात्रसंघ चुनाव की वोटिंग पर तो कुछ नहीं बोला लेकिन रिजल्ट पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा, 'नियमों के उल्लंघन से निपटने के लिए एक सिस्टम बनाने में दिल्ली यूनिवर्सिटी विफल रही. DU के अधिकारियों ने मानकों को गिरने क्यों दिया? और इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए?'

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साथ ही कोर्ट ने कहा कि 'अगर यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स को अनुशासित नहीं करेगा तो कौन करेगा. आपके पास सारी शक्तियां हैं. आप छात्रों को निष्कासित या फिर अयोग्य घोषित कर सकते हैं, लेकिन आपसे 21 उम्मीदवार नहीं संभाले गए. आप लाखों छात्रों को कैसे संभालेंगे.

यह स्थिति देश के आम चुनाव से भी बुरी: HC

हाई कोर्ट ने कहा है कि यह लोकतंत्र का उत्सव है न कि मनी लॉन्ड्रिंग का उत्सव है. अदालत ने कहा कि इस तरह से सिस्टम को युवाओं को करप्ट नहीं होने देना चहिए. कोर्ट ने कहा, ‘यह स्थिति देश के आम चुनाव से भी बुरी है. क्या कोई रिकॉर्ड है कि चुनाव में कितना पैसा इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसा लगता है करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है.'

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21 प्रत्याशी हैं मैदान में 

बता दें कि इस बार के चुनाव में कुल 21 प्रत्याशी मतदान में है. इसमें प्रेसिडेंट के लिए 8, वाइस प्रेसिडेंट के लिए 5, सेक्रेटरी के लिए 4 और ज्वाइंट सेक्रेटरी के लिए 4 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इसमें मुख्य मुकाबला ABVP और NSUI के बीच बताया जा रहा है. 

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