Rajasthan SIR: अलवर में चल रहे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के अंतिम चरण में आपत्ति अभियान को लेकर रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बड़ा मामला सामने आया है. एक माह से चल रहे इस अभियान के अंतिम दिनों में अचानक 1397 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज होने से ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मच गया है. इनमें ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि सुनियोजित तरीके से झूठी और फर्जी आपत्तियां दर्ज कराकर मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है तथा उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है.
इसी क्रम में ऊंटवाल गांव के सैकड़ों ग्रामीण रामगढ़ पंचायत समिति प्रधान नसरू खान के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचे. हालांकि एसडीएम के फील्ड में होने के कारण ग्रामीणों को कार्यालय में ही प्रतीक्षा करनी पड़ी. ग्रामीणों ने बाद में SDM को ज्ञापन दिया.
जिसके नाम आई एप्लीकेशन, उसने नकारा
ग्रामीण मौसम, नवाब खान, जफर और सुब्बा खान ने बताया कि एसआईआर आपत्ति अभियान के तहत उनके गांव के 106 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. आरोप है कि ये आपत्तियां गांव के ही नवाब के नाम से दर्ज कराई गई हैं, जबकि नवाब का कहना है कि वह कभी एसडीएम कार्यालय नहीं गया और न ही उसने किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज कराई.
मृतक और प्रवासी बताकर फर्जी आपत्तियां लगाई गई
नवाब ने आरोप लगाया कि उसके नाम का दुरुपयोग कर ग्रामीणों को मृतक और प्रवासी बताकर फर्जी आपत्तियां लगाई गई हैं. और उनके परिवार के छह लोगों के खिलाफ उनके नाम से ही आपत्ति दर्ज हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि जिन मतदाताओं को मृतक दर्शाकर आपत्ति दर्ज की गई है, वे सभी जीवित हैं और स्वयं एसडीएम कार्यालय पहुंचे हैं.
कांग्रेस नेता भी पहुंचे कार्यालय
वहीं, प्रधान नसरू खान ने बताया कि इसी तरह का मामला एक दिन पहले पिपरौली गांव से भी सामने आया था, जहां कांग्रेस नेता आर्यन जुबेर भी ग्रामीणों के साथ पहुंचे थे. ऊंटवाल गांव के ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और फर्जी आपत्तियां लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न काटा जा सके.
जिला कलेक्टर ने क्या कहा ?
जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने कहा कि 15 जनवरी रात 12 बजे तक आपत्तियां ली गई हैं. सभी फार्म ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे, जिनमें आपत्तिकर्ता का नाम और ईपीआईसी नंबर होगा. जांच के लिए सात दिन का समय मिलेगा और यह भी देखा जाएगा कि फार्म कहां से आए और किसने लगाए. उसके बाद ही इन आपत्तियों पर कोई फैसला लिया जाएगा.
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