
NDTV Rajasthan की विशेष प्रस्तुति 'आपके अफसर' (Aapke Afsar) से हम लगातार प्रशासनिक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे अफसरों के जीवन के विभिन्न पहलुओं से आपको रुबरु करवाते हैं. इस कड़ी में आज हम बात करेंगे शांति पदक से अलंकृत और दो बार डीजीपी डिक्स के साथ भारत सरकार के उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित राजस्थान पुलिस के एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील (ASP Thakur Chandrasheel) की.
एएसपी चंद्रशील को विभाग से जो भी जिम्मेदारी मिली, उन्होंने उसमें अपना सर्वोत्तम दिया और एक नज़ीर बने. वे इन दिनों राजस्थान के कोटा जिले में 'अभय कमांड सेंटर' के इंचार्ज का पद पर हैं, जहां कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को अवसाद मुक्त रखने के लिए स्टूडेंट सेल को संचालित कर रहे हैं.
प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा
झारखंड के रामगढ़ जिले के मूल निवासी ठाकुर चंद्रशील ने हजारीबाग सेंट कोलंबस स्कूल से शिक्षा हासिल की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. एलएलबी और लॉ की पढ़ाई की. 1999 में आरपीएस नियुक्त हुए बाद दिल्ली में आरएसी की आठवीं बटालियन में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट अपने करियर की शुरुआत की.
राजस्थान के भीम में पहली बार डीवाईएसपी नियुक्त हुए, उसके बाद दो बार कोटा में पुलिस उप-अधीक्षक के पद पर रहते हुए पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के कार्यों में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्तमान में ठाकुर चंद्रशील कोटा में अपने माता-पिता, पत्नी मीनू, दो बेटियों और छोटे भाई के साथ रहते हैं.

अपने परिवार के साथ राजस्थान पुलिस के एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील
ठाकुर चंद्रशील ने साल 2008 में इटली के विजेनिशा से युद्ध क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस स्टेशन मैनेजमेंट का कोर्स किया. वहीं, साल 2012 और 13 में साइप्रस में सिविल अफेयर पुलिस लाइजन ऑफिसर के रूप में भारत के दल का प्रतिनिधित्व करते हुए कमांडर की भूमिका में शांति पदक हासिल किया.
राजस्थान के जोधपुर, भिवाड़ी, उदयपुर में पुलिस सेवा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ठाकुर चंद्रशील एंटी करप्शन ब्यूरो में भी साढे़ 5 साल एडिशनल एसपी के तौर पर सेवाएं देकर उत्कृष्ट सेवा का पदक भारत सरकार द्वारा हासिल कर चुके हैं. उन्हें पुलिसिंग के श्रेष्ठ कार्य के लिए दो बार डीजीपी डिक्स से भी नवाजा गया.
जिम्मेदारियों को लेकर कर्तव्यनिष्ठता
सरकारी विभागों के वर्क कल्चर को लेकर ठाकुर चंद्रशील कहते हैं कि अगर उच्च अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाएंगे तो विभाग के कर्मचारी भी उसी अंदाज में कार्य करेंगे. उनका मानना है कि सरकारी विभागों में 10 से 20 प्रतिशत लोग गड़बड़ होते हैं. 75 प्रतिशत व्यक्ति अपने कार्य को जिम्मेदारी के साथ करता हैं. विभागों के इंचार्ज की कार्यकुशलता, गंभीरता और समर्पण किसी भी विभाग को सर्वश्रेष्ठ बना सकती है.
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ठाकुर चंद्रशील
विभागों में सुधार की आवश्यकता बताते हुए चंद्रशील कहते हैं छोटे कर्मचारी को दोष नहीं देना चाहिए, अगर अधिकारी अपना कार्य बेहतर करता है तो कर्मचारी भी उसी कार्यशैली को फॉलो करेंगे. कभी कोई परेशानी आती है तो उसको शेयर करने से समस्या का हल निकल आता है.
ठाकुर चंद्रशील आगे कहते हैं कि कभी कोई पारिवारिक परेशानी होती है तो परिवार के लोगों से साझाकर उसको दूर कर लिया जाना चाहिए, और अगर कोई समस्या विभाग से आती है तो उच्च अधिकारियों से बात करके उसको निपटाया जा सकता है.
छुट्टियां मिलती हैं तो साल में दो बार जाते हैं गांव
अपने पैतृक निवास से सैकड़ों किलोमीटर दूर कोटा में रह रहे ठाकुर चंद्रशील का कहना है कि पुलिसिंग में छुट्टियां ज्यादा करना उचित नहीं है, इसलिए साल में सिर्फ दो बार अपने गांव जाते हैं. चंद्रशील परिवार के लोगों के साथ झारखंड का विशेष त्योहार 'छठ पूजा' सबके साथ मनाते हैं और आम के सीजन में गांव जाकर आम का लुत्फ उठाना उनको बेहद पसंद है.
इसके अलावा ठाकुर चंद्रशील को अपने परिवार के साथ घूमने-फिरने का शौक है. वे कहते हैं बच्चों की पढ़ाई के चलते ज्यादा घूमना नहीं हो पाता, लेकिन मौका मिलता है तो ट्रिप्स पर परिवार के साथ देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर जाना उन्हें पसंद है. देश-विदेश के विभिन्न स्थानों की संस्कृति-सभ्यता को जानने की उत्सुकता हमेशा रहती है, क्योंकि उससे बहुत कुछ सीखने जानने को मिलता है.
पुलिसिंग के साथ सामाजिक सरोकार जीवन का हिस्सा
ठाकुर चंद्रशीलन कोटा में 'अभय कमांड सेंटर' के इंचार्ज होने के नाते अपराधिक मामलों के साथ-साथ 'अभय कमांड सेंटर' के सीसीटीवी कैमरा मॉनिटरिंग और कोचिंग स्टूडेंट्स की हेल्प के लिए स्थापित किया गया स्टूडेंट सेल को बखूबी संचालित कर रहे हैं. स्टूडेंट सेल, हाल ही में स्थापित की गई है. पिछले दिनों दो बच्चों को आत्महत्या से रोकने में इसी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. महज 1 महीने में लगभग 110 परिवाद स्टूडेंट सेल पर प्राप्त हुए हैं. वहीं हर रोज टीम के सदस्य हॉस्टल, पीजी, कोचिंग एरिया में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं उन्हें मोटिवेट कर रहे हैं.
ठाकुर चंद्रशील को किताबें पढ़ना, गाना सुनना, घूमना, फिल्में देखना, जानवरों के साथ वक्त बिताना पसंद है. योग और एक्सरसाइज के साथ अपने दिन की शुरुआत करने वाले चंद्रशील कोटा में भी वक्त निकालकर सामाजिक सरोकार के कार्यों में जुटे रहते हैं. वे झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े हैं. जब भी मौका मिलता है वे उनके बीच पहुंच जाते हैं और बच्चों को पढ़ाने के साथ मोटिवेट करते हैं. उदयपुर में भी वह ऐसी संस्थाओं से जुड़े थे और कोटा में भी सामाजिक सरोकार के इस कार्य में अपनी पत्नी के साथ जुटे हुए हैं.

कुत्ते के साथ मस्ती करते एएसपी ठाकुर चंद्रशील
विद्यार्थियों को अवसाद मुक्त बनाना है लक्ष्य
कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों में लगातार सुसाइड के मामले बढ़ने के बाद उस पर अंकुश कैसे लगाया जा सके इसके प्रयास में स्टूडेंट सेल के इंचार्ज के रुप में ठाकुर चंद्रशील लगातार विद्यार्थियों को अवसाद मुक्त रखने में टीम के साथ एक्टिव रहते हैं.
ठाकुर चंद्रशील कहते हैं कि प्रशासनिक सेवा कार्य में ड्यूटी के दौरान कई पेंचीदे मामलों को हल करने में अहम रोल निभाया है. अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए भी राजस्थान में प्रभावी कार्रवाई की, जब करप्शन को खत्म करने की जिम्मेदारी दी गई तो उसमें भी उच्च अधिकारियों को बेनकाब करने में कहीं पीछे नहीं हटे.