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This Article is From Jul 31, 2023

कर्ज़ में डूबे किसानों को राहत के लिए 2 अगस्त को बिल लाएगी गहलोत सरकार

किसान ऋण राहत आयोग के पास बैंकों से चर्चा करने का भी अधिकार होगा, और सूत्रों के मुताबिक, आयोग के पास ऋण अदायगी का तरीका तय करने का भी अधिकार होगा, जिनमें कर्ज़ अदायगी की समय सीमा को बढ़ाया जाना भी शामिल होगा.

कर्ज़ में डूबे किसानों को राहत के लिए 2 अगस्त को बिल लाएगी गहलोत सरकार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों के कर्ज़ माफ़ कर देने का वादा किया था...
जयपुर:

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार किसान ऋण राहत आयोग की स्थापना के लिए विधेयक पारित कर किसानों को कर्ज़ से राहत दिलाने की पूरी तैयारी कर चुकी है. 2 अगस्त को पेश होने जा रहा बिल उन वादों में से एक है, जो मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में किए थे. यह बिल व्यापार सलाहकार समिति, यानी BAC की बैठक के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा, और इसके ज़रिये किसानों को राहत मिलेगी.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसान ऋण राहत आयोग अर्द्ध-न्यायिक निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता राजस्थान हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे.

इस आयोग में वे किसान अपील कर सकेंगे, जो वित्तीय संकट, फसलों को होने वाली हानि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कर्ज़ा चुकाने में असमर्थ हैं, और उनके ख़िलाफ़ बैंकों ने कर्ज़ का भुगतान नहीं होने के कारण ज़मीन की नीलामी या ज़ब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी हो.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों के कर्ज़ माफ़ कर देने का वादा भी किया था, और पिछले चार साल में लगभग 21 लाख किसानों के कुल 15,000 करोड़ रुपये के कर्ज़ माफ़ किए हैं. लेकिन ये कर्ज़ मोटे तौर पर सहकारी बैंकों से लिए गए लोन हैं, क्योंकि केंद्र सरकार के तहत आने वाले बैंकों ने किसानों के कर्ज़ माफ़ नहीं किए हैं. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने पेशकश की थी कि यदि केंद्र सरकार कर्ज़ माफ़ कर देगी, तो राज्य सरकार अपना हिस्सा दे देगी, लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं.

इसलिए चुनावी साल में यह राजनैतिक रूप से कतई समीचीन होगा कि राज्य सरकार संकट में फंसे किसानों के लिए इस समस्या का हल लेकर आए. किसान ऋण राहत आयोग के तहत यह भी प्रस्तावित है कि यदि किसान का कोई मामला आयोग के पास लंबित है, तो बैंक उनकी ज़मीन की नीलामी तब तक नहीं कर सकेंगे, जब तक आयोग द्वारा मामले का निपटारा नहीं कर दिया जाता. इसके ज़रिये किसानों को काफ़ी राहत मिलेगी.

ऋण राहत आयोग के पास बैंकों से चर्चा करने का भी अधिकार होगा, और सूत्रों के मुताबिक, आयोग के पास ऋण अदायगी का तरीका तय करने का भी अधिकार होगा, जिनमें कर्ज़ अदायगी की समय सीमा को बढ़ाया जाना भी शामिल होगा.

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