शहर से लेकर सरहद तक, हर गांव कस्बे और बड़े शहरों में दीपावली के पर्व की धूम है. लक्ष्मी पूजन से लेकर घर में आने वाले महमानों के अलग-अलग किस्म की मिठाइयों की खरीदारी का दौर जारी है. लेकिन जैसलमेर में आज भी कड़कड़ (मिठाई) बनाने की परम्परा लगातार जारी है. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में उपयोग में आने वाली इस कड़कड़ मिठाई को विशेष रूप से तैयार किया जाता है.
ऐसा कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के पूजन में यह कड़कड़ मिठाई का विशेष महत्त्व है. सामान्य रूप से केवल शक्कर और इलायची से बनाई गई यह कड़कड़ मिठाई को बच्चे बेहद चाव से खाते हैं. गर्म-गर्म शक्कर के सीरप में कुटी हुई इलायची डाली जाती है फिर मटकियों को उल्टा कर उसके पैंदे पर इस शक़्कर के घोल को ढाल कर बनाया जाता है. यह मिठाई जितनी पतली हो उतनी अच्छी लगती है.
मां लक्ष्मी को लगता है विशेष प्रसाद
यह मिठाई मुख्य रूप से दिवाली के दिनों में बनाई जाती है. कड़कड़ प्रसाद को मां लक्ष्मी के पूजन में मुख्य रूप से चढ़ाते है. वहीं गांव से लेकर शहर तक दिवाली के वक्त इसकी बिक्री जबरदस्त होती है. कड़कड़ मिठाई को लेकर जैसलमेर की कुछ प्रमुख्य दुकानों में जोरदार क्रेज होता है.
जैसलमेर में कड़कड़ मिठाई के विक्रेता विक्रम चूरा बताते हैं कि यह मिठाई लक्ष्मी जी की सबसे प्रिय मिठाई है. इसलिए इस मिठाई की डिमांड दीपावली के दिनों में काफी ज्यादा रहती है. इसे दीवाली के दिनों में विशेष रूप से बनाया जाता है.
शरद पूर्णिमा से शुरू हो जाती है तैयारी
कड़कड़ मिठाई को सिर्फ दिवाली के दिन के लिए ही बनाया जाता है. इस मिठाई को लक्ष्मी पूजन में विशेष तौर पर शामिल किया जाता है. इसका प्रसाद के रूप में विशेष महत्व है. यह स्पेशल मिठाई एकदम कांच की तरह दिखती है. इसे दिवाली पर्व पर एक महीने के लिए ही बनाया जाता है. यह मिठाई लक्ष्मी जी की सबसे प्रिय मिठाई है. इसलिए इस मिठाई की डिमांड दिवाली के दिनों में जबरदस्त रहती है.
200 रुपए प्रति किलो है कीमत
कड़कड़ मिठाई को कांच वाली मिठाई के नाम से भी जाना जाता है. प्रसाद के रूप में चढ़ने वाली यह मिठाई मां लक्ष्मी के साथ-साथ बच्चों को भी काफी पसंद है. इसे बच्चों ने ही कांच वाली मिठाई नाम दे दिया है. यह मिठाई दूध, शक्कर और इलायची से बनाई जाती है. जैसलमेर जिले में इसकी औसतन कीमत 200 रुपए प्रति किलो है.