
गहलोत कैबिनेट की बैठक में बुधवार को रक्षा मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण मांगों पर मुहर लगाई गई है.जैसलमेर कें शाहगढ़ क्षेत्र में सेना की मैन्युअल रेंज और रामगढ़ कें नेतसी में हेलीकॉप्टर यूनिट की एविएशन बेस के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा पैसा जमा करवाने के बाद जमीन आवंटित की जाएगी.
गौरतलब है सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सरहदी जिले जैसलमेर में थल सेना, वायु सेना और सीमा सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी से लगा हुआ है और समय-समय पर सभी अपने युद्ध कौशल को परखने के लिए यहां कई अंतराष्ट्रीय एक्सरसाइज भी होती रहती है. यही कारण है कि जैसलमेर के कई क्षेत्रों में रक्षा मंत्रालय की ओर से जमीन आवंटन की मांग की जा रही थी.
आर्मी ने यह कंपोजिट एविएशन बेस अपनी हेलीकॉप्टर यूनिट के लिए लिया है. ताकि यहां पर आर्मी के हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सके. साथ ही, प्रशिक्षण के दौरान यहां से उड़ान भी भर सके. आर्मी की मैन्युअल रेंज के लिए तहसील के शाहगढ़ और गेराजा क्षेत्र में 7872 हेक्टेयर जमीन आर्मी को आवंटित करने का फैसला लिया गया.

इस रेंज कें लिए थल सेना द्वारा पिछले एक दशक से प्रयास किए जा रहे थे. आख़िरकार बुधवार को गहलोत कैबिनेट की बैठक में इस रेंज कें लिए जमीन आवंटन पर भी मुहर लग ही गई हैं. जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव 29 मार्च को तत्कालीन जिला कलेक्टर ने भेजा था. इस रेंज में आर्मी के जवानों कें द्वारा अपने युद्ध कौशल को परखने के साथ-साथ छोटे हथियारों की मारक क्षमता भी परखी जा सकेगी.
अब तक जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में हथियारों का परीक्षण होता रहता है. भीषण गर्मी में हथियारों, टैंकों और गोला बारूद को परखने के लिए युद्धाभ्यास पोकरण रेंज में होते रहते हैं. वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास वायुशक्ति भी इस रेंज में हो चुका है.
इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल (BSF) के पास भी जैसलमेर के किशनगढ़ क्षेत्र में फायरिंग रेंज मौजूद हैं. जहां कई बार परीक्षण हुए है. भारतीय सेना समय-समय पर अपने हथियारों को अपग्रेड करने के साथ नए हथियार भी खरीदती है. इस सभी हथियारों के परीक्षण के लिए जैसलमेर में पोकरण सबसे बेहतर जगह मानी जाती है.
इसे भी पढ़े- मन मोह रहा प्रवासी पक्षियों का कलरव, 6 हज़ार किमी का सफर तय कर कुरजां पहुंचीं जैसलमेर