
साल था 2020 और तारीख़ थी 19 जुलाई. उस वक्त राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष थे सचिन पायलट. लेकिन वो अपनी ही सरकार के खिलाफ अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में एक होटल में जा कर बैठ गए. राजस्थान कांग्रेस में हाहाकार मच गया. गहलोत सरकार गिरने की आहटें आने लगी. एक-एक कर कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर जमा हो रहे थे. लेकिन राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत ने कुछ ऐसी सेटिंग लगाई कि उनकी सरकार भी बच गई और कुर्सी भी.
पायलट को बगावत का खामियाजा भुगतना पड़ा. बागी होकर जयपुर से 200 किलोमीटर दूर बैठे सचिन पायलट की कुर्सी नहीं बच पाई. उनसे पहले डिप्टी CM की पोस्ट छिनी और फिर सूबे के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया.
फिर आई 22 जुलाई. कांग्रेस के विधायक जयपुर के बाहरी इलाक़े के एक होटल में जमा थे. बाहर मीडिया का जमावड़ा था. सवाल बहुत से थे. उनमें से एक यह भी है कि अब राजस्थान में कांग्रेस की कमान कौन संभालेगा? दिन में करीब दो बजे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला और उनके साथ अजय माकन होटल के बाहर आकर मीडिया से मुखातिब हुए और एक घोषणा की.
सूरजेवाला ने घोषणा की, हमारे बेहद तजुर्बेकार और क़ाबिल साथी, जिन्होंने किसान परिवार में जन्म लिया, जिन्होंने अपनी ज़मीन भी जोती और कांग्रेस की ज़मीन भी जोती, जो एक आम कार्यकर्ता से जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से उठ कर आये, और आज राजस्थान के शिक्षा मंत्री तौर पर कार्य कर रहे हैं, गोविन्द सिंह डोटासरा को, राजस्थान कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है.

राहुल गांधी के साथ डोटासरा की एक पुरानी तस्वीर
आज के सियासी क़िस्से में बात राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की. 1 अक्टूबर 1981 को राजस्थान के सीकर ज़िले की लक्ष्मणगढ़ तहसील के गांव कृपा राम जी की ढाणी में डोटासरा का जन्म हुआ. उनके पिता मोहन सिंह डोटासरा प्राइमरी स्कूल टीचर थे. डोटासरा ने अपनी पढ़ाई राजस्थान यूनिवर्सिटी से की पूरी की. बीए बी.एड किया और उसके बाद वकालत की पढ़ाई की और यही वो समय था जब वो कांग्रेस से जुड़े.
यूथ कांग्रेस के साथ उनका सियासी सफर शुरू हुआ और फिर साल आया 2005. इस साल डोटासरा 40 साल की उम्र में पहली बार लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के प्रधान चुने गए. कहते हैं शेखावाटी के दिग्गज कांग्रेसी नेता और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे नारायण सिंह चौधरी डोटासरा के गॉडफादर थे.
डोटसारा को प्रधान रहते अभी तीन साल ही हुए थे कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव आ गया. यह साल था 2008. गोविन्द सिंह डोटासरा को लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस ने विधायकी का टिकट दिया और डोटासरा महज़ 34 वोटों के अंतर से जीत कर पहली बार विधानसभा पहुंचे.

अध्यक्ष के बनने के बाद अशोक गहलोत के साथ डोटासरा.
फिर आया साल 2013. यह वो दौर था जब पूरे देश में मोदी लहर थी. 6 महीने बाद देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे. भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था. देश की राजनीति मोदीमय हो गयी थी. दिसंबर में राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए और सत्तारूढ़ कांग्रेस 200 सीटों में से सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस के इन 21 विधायकों में से एक नाम गोविन्द सिंह डोटासरा का भी था. वो एक बार फिर चुनाव जीते और इस बार जीत का मार्जिन था दस हजार.
और यहीं से शुरू हुई शेखावाटी इलाक़े में कांग्रेस के बड़े नेता के पैदा होने की कहानी. महज़ दूसरी बार विधायक बने और पार्टी ने उन्हें उपनेता प्रतिपक्ष और विधानसभा में मुख्य सचेतक बना दिया. इसे परस्तिथियों से उपजा नतीजा कहें या फिर डोटासरा की क़िस्मत. लेकिन डोटासरा यहीं से राजस्थान में कांग्रेस की पहली पंक्ति के नेताओं में शुमार होने लगे.

मंच पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ डोटासरा.
प्रदेश में पांच साल कांग्रेस विपक्ष में रही और फिर 2018 का विधानसभा चुनाव आया गया. पार्टी ने दिल्ली से सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर का भेजा था. राज बदलने का समय था. ये सूबे की राजनीति का नियम है. हर पांच साल में सत्ता बदल जाती है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ भयंकर एंटी इंकम्बेंसी थी. प्रदेश में नारा गूंजता था " मोदी तुझसे बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं".
मोदी लहर मद्धम पड़ने लगी थी. चुनाव हुआ और भाजपा हार गई. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. फिर मुख्यमंत्री कौन बने कि लड़ाई चली, खत्म हुई तो अशोक गहलोत पर. गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने और सचिन पायलट को बनाया गया उप मुख्यमंत्री.
गहलोत की टीम बनी और गोविंद सिंह डोटासरा काबीना में शिक्षा राज्य मंत्री बने. उन्हें स्वतंत्र प्रभार दिया गया. उनके शिक्षा मंत्री रहते हुए प्रदेश में पेपर लीक के कई मामले हुए. भाजपा ने उनपर जमकर निशाना साधा. डोटासरा पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता रहा और दो साल बीत गए.

अपनी नामांकन सभा के दौरान डोटासरा.
साल 2020 आया. राजस्थान की कांग्रेस पूरी तरह बदल गई. सचिन पायलट ने गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत कर दी. बगावत हुई तो पायलट से अध्यक्ष पद छीन लिया गया. सारी परिस्तिथियां ऐसी ही बन रहीं थीं जैसी 2013 में थीं और गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिए गए.
राजस्थान में 25 नवंबर को चुनाव होने हैं डोटासरा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. उनकी रहनुमाई में कांग्रेस सत्ता बदलने के रिवाज को बदलना चाहती है. हर होर्डिंग में डोटासरा का फोटो है. ये किस्सा है गोविन्द सिंह डोटासरा का. एक ऐसे नेता का जो प्राइमरी स्कूल के अध्यापक के घर पैदा हुआ और देश के सबसे बड़े सूबे में देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पद तक पहुंचा.
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