राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा अपनी पत्नी के साथ बुधवार को नींदड़ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की जयंती समारोह में शामिल हुए. उन्होंने जगद्गुरु को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वाद लिया. उन्होंने जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य महाराज को वर्तमान समय के महान विद्वान, तपस्वी और भगवान राम के अद्वितीय भक्त बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जगद्गुरु ने अपने जीवनभर के तप, विद्वता और आध्यात्मिक प्रयासों से देश और विदेश में भारतीय संस्कृति को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है.
भगवान राम जीवन के कण में बसे हैं- सीएम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि जयपुर में श्रीराम कथा का आयोजन होना समाज के लिए एक सौभाग्यपूर्ण संयोग है और हर जगह भगवान राम की दिव्य उपस्थिति महसूस की जा रही है. भगवान राम हमारे जीवन के हर कण में बसे हैं और भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक नींव हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज भगवान राम के नाम की खुशबू पूरे देश में फैल रही है. हनुमान चालीसा के पाठ से लेकर वैदिक मंत्रों के जाप तक, हर कोने में भक्ति की गूंज सुनाई दे रही है.”
साहित्य-धर्म के क्षेत्र में जगद्गुरू के योगदान का उल्लेख
उन्होंने साहित्य और धर्म के क्षेत्र में जगद्गुरु के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसी पीठ की स्थापना कर उन्होंने रामायण और हिंदी साहित्य की असाधारण सेवा की है. जगद्गुरु ने चित्रकूट से लेकर पूरे विश्व तक इन मूल्यों के प्रचार के लिए अपना जीवन समर्पित किया है.
जगद्गुरु पूज्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के 77वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर उनसे भेंट कर शुभकामनाएँ दीं एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उनका स्नेह और मार्गदर्शन सदैव प्रेरणा देता है। pic.twitter.com/35qc7zxFoQ
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) January 14, 2026
दिव्यांग छात्रों को सहायक उपकरण वितरित किए
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शर्मा ने रामानंद मिशन की ओर से दिव्यांग छात्रों को सहायक उपकरण वितरित किए. उन्होंने सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को हेलमेट भी वितरित किए और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सफाई कर्मियों को सम्मानित किया. इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, सांसद मदन राठौड़, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम सहित बड़ी संख्या में संत, विद्वान और श्रद्धालु मौजूद रहे.
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