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This Article is From Jan 11, 2026

करौली की फायर ब्रिगेड बेकार, आठ में से पांच फायर गाड़ियां कबाड़; 3 में पानी टैंक लीक 

राजस्थान के करौली शहर में अग्निशमन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. आठ में से सिर्फ तीन फायर गाड़ियां काम कर रही हैं, वो भी खराबियों से घिरी है. बाकी वाहन वर्षों से कबाड़ बने पड़े हैं.

करौली की फायर ब्रिगेड बेकार, आठ में से पांच फायर गाड़ियां कबाड़; 3 में पानी टैंक लीक 
करौली शहर में अग्निशमन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

Rajasthan News: राजस्थान में करौली शहर की अग्निशमन व्यवस्था इन दिनों बुरी तरह बिगड़ी हुई है. नगर परिषद की उदासीनता के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. शहर की बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए यह स्थिति और चिंताजनक है. करोड़ों रुपये के फायर वाहन कबाड़ में बदल चुके हैं जबकि थोड़ी सी सावधानी से इन्हें चलाया जा सकता था. शहरवासी अब भगवान भरोसे जी रहे हैं.

केवल तीन वाहन चालू हालत में लेकिन वे भी असुरक्षित

नगर परिषद के पास कुल आठ फायर गाड़ियां हैं लेकिन इनमें से सिर्फ तीन ही काम कर रही हैं. इन तीनों में भी एक गाड़ी का पानी टैंक लीक हो रहा है जिससे आग बुझाने की क्षमता कमजोर पड़ गई है. कागजों पर भले तीन गाड़ियां दिखें लेकिन असल में शहर की सुरक्षा रामभरोसे है. बाकी पांच गाड़ियां सालों से खराब पड़ी हैं और इनकी मरम्मत नहीं हुई.

आयुक्त का बयान: नीलामी और नई डिमांड की तैयारी

कार्यवाहक आयुक्त प्रेमराज मीणा ने कहा कि आठ में से तीन गाड़ियां ठीक चल रही हैं. महुआ गैरेज में दो गाड़ियां रखी हैं. खराब वाहनों को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू होगी और शहर के अंदर इस्तेमाल के लिए छोटी गाड़ी की मांग भेजी जाएगी.

सालों से खराब पड़े वाहन बन चुके कबाड़

पांच फायर वाहनों की हालत इतनी खराब है कि वे अब बेकार हो चुके हैं. 2020 से दो गाड़ियां बंद हैं. इनमें से एक का पंप खराब है और वह अग्निशमन केंद्र पर ही खड़ी है. दो अन्य वाहन महुआ के एक गैरेज में पड़े हुए हैं जहां उनकी कोई सुध नहीं ली गई.

इसके अलावा 2024 से एक छोटी गाड़ी खराब है. 14,500 लीटर वाली बड़ी गाड़ी भी अक्टूबर 2024 से बैटरी और टायर न होने के कारण बेकार पड़ी है. नगर परिषद की यह लापरवाही शहर को जोखिम में डाल रही है.

आग बुझाने में सिलेंडरों पर निर्भरता बढ़ी

शहर में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए अब सिर्फ फायर सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा है. अगर बाजार घनी बस्ती या बड़े कारोबारी इलाके में बड़ी आग लगे तो मौजूदा संसाधनों से उसे रोकना मुश्किल होगा. करौली जैसे पुराने और घने शहर में यह स्थिति किसी भयानक हादसे को बुलावा दे रही है.

2022 हिंसा के सबक भूल गई नगर परिषद2022 की करौली हिंसा में आगजनी की कई घटनाएं हुईं थीं. तब अग्निशमन की कमियां सबके सामने आईं लेकिन उसके बाद भी कोई सुधार नहीं किया गया. न वाहनों की मरम्मत हुई न नए संसाधन जोड़े गए. शहर की संवेदनशीलता बढ़ने के बावजूद लापरवाही जारी है.

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