विज्ञापन

Khejri Bachao Andolan: राजस्थान के लिए क्यों खास है खेजड़ी? इन 10 बातों से आप समझ जाएंगे

राजस्थान के 'राज्य वृक्ष' खेजड़ी की रक्षा के लिए इन दिनों एक आंदोलन चल रहा है. आइए समझते हैं कि राजस्थान के लिए क्यों ख़ास है खेजड़ी.

Khejri Bachao Andolan: राजस्थान के लिए क्यों खास है खेजड़ी? इन 10 बातों से आप समझ जाएंगे

राजस्थान में पिछले कुछ समय से 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' की बड़ी चर्चा हो रही है. इसकी शुरुआत बीकानेर से हुई जहां स्थानीय लोगों ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए खेजड़ी वृक्ष की कटाई को लेकर विरोध शुरू किया था. लेकिन देखते-देखते इसने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया. पर्यावरण आंदोलनकारियों से लेकर संत समाज और राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपना पक्ष रखा. सभी खेजड़ी वृक्ष को बचाने के प्रश्न पर एकमत हैं. लेकिन, खेजड़ी में ऐसा क्या ख़ास है? आइए खेजड़ी वृक्ष के बारे में कुछ ज़रूरी बातों को समझते हैं.

  1. खेजड़ी वृक्ष वैसे तो दक्षिण पश्चिम एशिया और अफ्रीका में पाया जाता है, लेकिन राजस्थान में इसका ख़ास महत्व है. राजस्थान में इसे राज्य वृक्ष का दर्जा प्राप्त है. खेजड़ी को राजस्थान में यह विशेष दर्जा 1983 में दिया गया था. यह राजस्थान में पर्यावरण, अर्थव्यवस्था तथा संस्कृति में खेजड़ी के महत्व को दर्शानेवाला फ़ैसला था.
  2. खेजड़ी पश्चिमी राजस्थान में पाया जानेवाला एक ऐसा पेड़ है जो रेगिस्तान के कठिन वातावरण में भी टिका रहता है. राजस्थान के थार रेगिस्तान के जिलों और शेखावाटी क्षेत्र में सबसे ज़्यादा पाया जानेवाला खेजड़ी ऐसी जगहों पर भी उग जाता है जहां की मिट्टी सूखी होती है और उसमें कम नमी होती है.
  3. ग्रामीण इलाक़ों में इसे बहुत पुराने समय से लगाया जाता रहा है और अनुभव से ग्रामीणों ने समझ लिया था कि इससे दूसरी फसलों को कोई नुक़सान नहीं होता. बल्कि, इसके अनेक फ़ायदे होते हैं. यह मिट्टी को बांधे रखती है, इससे रेगिस्तान में रेत के टीले स्थिर रहते हैं. इसकी जड़ें भूमिगत जल तक पहुंचने में मदद करती हैं और खास तौर पर सूखे के समय मददगार होती हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. 
    Latest and Breaking News on NDTV

    Photo Credit: IANS

  4. खेजड़ी का इस्तेमाल ईंधन, चारे, दवा, सब्ज़ी के रूप में होता है. चारे के तौर पर इसका ख़ास महत्व है क्योंकि लूंग के नाम से जानी जानेवाली इसकी पत्तियां बहुत पौष्टिक होती हैं जिनमें 12-18% प्रोटीन होता है.
  5. खेजड़ी के फल को सांगरी कहा जाता है जिसे ग्रामीण सब्ज़ी बनाकर खाते हैं. सूखी सांगरी बाज़ार में 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम के दर से बिकती है.
  6. खेजड़ी की लकड़ी काफ़ी टिकाऊ मानी जाती है जिसका इस्तेमाल झोपड़ियों को बनाने में किया जाता है. इसकी लकड़ी खेती के काम में इस्तेमाल होनेवाले औज़ार बनाने में भी काम आती है. इसकी लकड़ी से फर्नीचर भी बनाए जाते हैं.
  7. खेजड़ी की छाल दवा का काम करती है. इसका इस्तेमाल गठिया के इलाज और बिच्छू काटने पर किया जाता है.
  8. खेजड़ी वृक्ष पर्यावरण प्रेमी बिश्नोई समुदाय के लिए धार्मिक आस्था का वृक्ष माना जाता है. पर्यावरण की रक्षा के अपने संकल्प की वजह से बिश्नोई समुदाय खेजड़ी की रक्षा के लिए सजग रहता है.
  9. खेजड़ी की रक्षा के लिए जोधपुर के खेजड़ली गांव में लगभग 300 वर्ष पहले एक ऐतिहासिक आंदोलन हुआ था. खेजड़ली को कटने से बचाने के लिए हुए इस आंदोलन में 12 सितंबर, 1730 को अमृता देवी के नेतृत्व में 363 बिश्नोई महिला-पुरुषों और बच्चों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था. इस घटना को खेजड़ली नरसंहार के नाम से जाना जाता है. 
  10. खेजड़ी को 'रेगिस्तान का राजा' भी कहा जाता है. इसके बहुउद्देश्यीय महत्व की वजह से खेजड़ी को प्राचीन ग्रंथों में मरुस्थल का 'कल्पवृक्ष' भी कहा गया है.

Rajasthan.NDTV.in पर राजस्थान की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार, लाइफ़स्टाइल टिप्स हों, या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें, सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Close