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राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव पर सरकार ने HC से मांगा दिसंबर तक का समय, पूर्व विधायक ने दायर की अवमानना याचिका

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव टालने पर सियासी घमासान मचा हुआ है. पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की, तो वहीं सरकार ने पाबंदी और संसाधनों की कमी का हवाला देकर दिसंबर तक का समय मांगा है.

राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव पर सरकार ने HC से मांगा दिसंबर तक का समय, पूर्व विधायक ने दायर की अवमानना याचिका
प्रतीकात्मक तस्वीर
Meta (AI)

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच कानूनी और सियासी जंग तेज हो गई है. एक तरफ जहां भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर 15 अप्रैल की समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताते हुए इसे दिसंबर तक टालने की गुहार लगाई है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा ने राजस्थान सरकार और राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर 'अवमानना याचिका' (Contempt Petition) दायर कर दी है. इस अवमानना याचिका पर कल (सोमवार) कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है.

 'बिना OBC आरक्षण चुनाव कराना सामाजिक न्याय के खिलाफ

राज्य सरकार ने पंचायत और निकाय चुनावों को टालने के लिए हाईकोर्ट पहले ही पहुंच गई थी . सरकार ने प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि अगले साल 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं था और मौजूदा  परिस्थितियों को देखते हुए  दिसंबर तक भी स्थिति अनुकूल नहीं दिख रही है. हालांकि पिछले सुनवाई में कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की.

OBC आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला

प्रार्थना पत्र में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूलों की व्यस्तता, स्टाफ की उपलब्धता, ईवीएम और अन्य संसाधनों की कमी जैसे कारणों का हवाला दिया गया है. सरकार का कहना है कि नए सिरे से ओबीसी आरक्षण लागू किए बिना चुनाव कराना सामाजिक न्याय के विपरीत होगा. अगले साल अप्रैल के लिए सरकार ने कहा है कि स्कूलों में नया सत्र शुरू है और 25 अप्रैल तक प्रवेश चलेंगे, इसलिए शिक्षक चुनाव कार्य में पूरी तरह उपलब्ध नहीं रहेंगे.

मौसम और आपदा प्रबंधन बने कारण

मई-जून में भीषण गर्मी और आपदा प्रबंधन की जरूरत बताई गई है, जबकि जुलाई-सितंबर में बारिश और कृषि कार्यों के कारण ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहेंगे. अक्टूबर-दिसंबर के लिए सरकार ने कहा है कि कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, इसलिए चुनाव उस समय कराना अधिक उचित होगा.

लाखों कर्मचारियों और भारी संसाधनों की जरूरत

सरकार ने अदालत को आंकड़ों के जरिए समझाया कि चुनाव कराना इस समय एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती है.प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि शहरी निकायों के लिए 22,891 मतदान केंद्र और ग्रामीण क्षेत्रों में 45,380 मतदान केंद्र बनाए जाने की संभावना है.

शहरी मतदान केंद्रों के लिए लगभग 1,14,455 कर्मियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2,26,900 कर्मियों की जरूरत होगी. साथ ही सरकार ने ईवीएम मशीनों को रीसेट करने और अन्य तैयारियों को भी बड़ा प्रशासनिक काम बताया है.

जनता को संवैधानिक अधिकार से वंचित कर रही सरकार-संयम लोढ़ा 

अदालत के पिछले आदेशों का हवाला देते हुए पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. लोढ़ा ने कहा कि राजस्थान की जनता पंचायत और नगर पालिका के वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित है.  गर्मी पड़ रही है, खेती का समय है, बरसात है, स्कूल के प्रवेश चल रहे हैं, सरकार ऐसे कारण लेकर चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने के लिए कोर्ट पहुंची है. यह सीधे तौर पर अदालत के आदेशों की अवमानना है, जिसके खिलाफ हमने याचिका दायर की है और कोर्ट ने इस पर नोटिस भी जारी किए हैं.

  हाईकोर्ट देरी के लिए ता चुका है नाराजगी

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान  हाईकोर्ट ने भी चुनावों में हो रही देरी और टालमटोल के रवैये पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी.

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