Flag hosting vs Unfurling: भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. पूरा देश दिल्ली के कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक भव्यता देखने के लिए जोश है. अब बस इंतजार है कल सुबह के सूरज का, जब राष्ट्रपति परेड की सलामी लेने से पहले 'ध्वजारोहण' (Flag Hoisting) नहीं, बल्कि तिरंगा फहराएंगे. लोग अक्सर इस मौके पर "फ्लैग होइस्टिंग" शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन, रिपब्लिक डे पर 'ध्वजारोहण' नहीं किया जाता, बल्कि उसे फहराया जाता है. आइए समझते हैं इसके पीछे का कारण कि आखिर रिपब्लिक डे की यह परंपरा स्वतंत्रता दिवस से अलग क्यों है:
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के बीच तिरंगा फहराने में ये हैं बड़े अंतर
ध्वजारोहण और झंडा फहराने में अंतर
15 अगस्त को झंडा नीचे से ऊपर जाता है जो एक नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक माना जाता है, जबकि 26 जनवरी को झंडा पहले से ही खंभे के सिरे पर बंधा होता जो केवल एक डोर खींचकर फहराना होता है. यह गणतंत्र देश का सूचक माना जाता है.
गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण और स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना
26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के दिन झंडा पहले से ही खंभे के ऊपरी हिस्से पर बंधा होता है. देश के राष्ट्रपति केवल रस्सी खोलकर उसे फहराते हैं. इस प्रक्रिया को'झंडा फहराना' (Flag Unfurling) कहा जाता है क्योंकि भारत पहले से ही स्वतंत्र हो चुका था और संविधान लागू कर अपना गौरव स्थापित कर रहा था. 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के दिन तिरंगा नीचे से रस्सी खींचकर ऊपर की ओर ले जाया जाता है, फिर खोलकर फहराया जाता है. इसे 'ध्वजारोहण' (Flag Hoisting) कहते हैं. यह 1947 में ब्रिटिश झंडे को उतारकर भारतीय ध्वज को ऊपर ले जाने का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री बनाम राष्ट्रपति
26 जनवरी 1950 में इसी दिन भारत ने अपना संविधान अपनाया था, इसलिए संवैधानिक प्रमुख ही झंडा फहराते हैं. जो आजाद भारत में देश के राष्ट्रति को माना जाता है. जो कर्तव्य पथ पर हर साल झंडा फहराते हैं. वही 15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं. क्योंकि 15 अगस्त 1947 मेंभारत ने 200 वर्षों से अधिक समय तक ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन रहने के बाद आजादी पाई थी. लेकिन अजादी के समय देश का संविधान लागू नहीं हुआ था जो आजादी मिलने के लगभग 2 साल, 3 महीने और 11 दिन बाद, 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था. इसे पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया.
कर्तव्य पथ पर दिखती है देश की भव्यता
26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (जिसे पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था) पर होता है. 1950 में पहली बार यहां भव्य परेड और झांकियों के जरिए देश अपनी शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया था, तब से हर साल भारत अपनी प्रगति और विकास और अदम्य साहस का परिचय 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर देता है. वही 15 अगस्त के दिन ध्वजारोहण का मुख्य कार्यक्रम पुरानी दिल्ली के लाल किले पर आयोजित होता है.जहां प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश के आने वाले सालों की प्रगति का खाका बताते है. साथ ही पिछले साल में हुए देश में विकास के कार्यों का लेखा जोखा भी देते है.
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