Rajasthan News: राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के लिए राहत की खबर आई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम आने से किसी उम्मीदवार को नौकरी पाने का सीधा अधिकार नहीं बनता. इस फैसले से भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों की पालना पर जोर दिया गया है और आयोग की स्वतंत्रता को मजबूत किया गया है.
जानें क्या था मामला
यह फैसला कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती 2013 और 2019 के अलावा सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती 2020 से जुड़ा है. मुख्य लिस्ट के कुछ चुने गए उम्मीदवारों ने नौकरी जॉइन नहीं की तो रिक्त पदों पर रिजर्व लिस्ट के उम्मीदवारों ने दावा किया. यति जैन आकृति सक्सेना और विवेक कुमार मीणा जैसे उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में नियुक्ति के आदेश दिए.
इसके बाद आयोग ने डिवीजन बेंच में अपील की लेकिन वहां भी हार गई. आखिरकार आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने हाईकोर्ट के दोनों आदेशों को पलट दिया. आयोग के संयुक्त विधि परामर्शी राकेश ओझा ने बताया कि यह फैसला नियमों की जीत है.
नियमों की सख्ती पर जोर
कोर्ट ने साफ कहा कि राजस्थान सेवा नियमों के मुताबिक रिजर्व लिस्ट मुख्य लिस्ट भेजने की तारीख से सिर्फ छह महीने तक वैध रहती है. उसके बाद यह लिस्ट खत्म हो जाती है. उम्मीदवारों को सिर्फ लिस्ट में नाम से कोई कानूनी हक नहीं मिलता.
आरपीएससी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था
इस फैसले में आरपीएससी को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया गया. राज्य सरकार अपील न करें तब भी आयोग को नियम बचाने के लिए कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है. इससे आयोग की स्वायत्तता मजबूत हुई है.
साथ ही कोर्ट ने चेताया कि अगर चयन प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक खींचा जाए तो नई भर्तियों की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के मौके छिन जाएंगे. यह फैसला भर्ती की शुचिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. हालांकि कोर्ट ने उम्मीदवारों से सहानुभूति जताई लेकिन कहा कि नियमों और समय सीमा के खिलाफ आदेश नहीं दे सकते.
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