
Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने जलझूलनी ग्यारस पर प्रदेश के सभी जलाशयों में विशेष पूजा अर्चना करने के निर्देश दिए हैं. वहीं बांसवाड़ा में आज शहर भ्रमण पर निकलेंगे भगवान. जिले में पिछले 1100 साल पहले परंपरा रियासत काल से चली आ रही है. जलझूलनी ग्यारस के दिन शहर के विभिन्न मंदिरों से ठाकुर जी की सवारी निकलती है और शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए राज तालाब जलाशय पर पहुंचती है. यहां पर पहले राज तालाब में जल देवता की विशेष पूजा अर्चना होती है और उसके बाद भगवान का यहां पर स्नान और अभिषेक कराया जाता है. स्नान के बाद ठाकुर जी को फिर से अपने मंदिर में ढोल नगाड़ों के साथ में पहुंचाया जाता है.
1100 साल से मनाई जाती है जलझूलनी ग्यारस
शहर के पीपली चौक पर बना रघुनाथ मंदिर जो कि करीब 1500 साल पुराना है. इस मंदिर से रियासत काल से यह सवारी शुरू होती आई है. मंदिर के पंडित जयंतीलाल जोशी ने बताया कि इस मंदिर से राजाओं के सानिध्य में 1100 साल से जलझूलनी ग्यारस के दिन विभिन्न मंदिरों से आए सवारी के साथ में विभिन्न मार्गो से होते हुए राम रेवाड़ी सवारी राज तालाब पहुंचती है. तालाब पर पहले जल देवता की पूजा अर्चना की जाती है और जल देवता से प्रार्थना की जाती है कि पूरे साल शहर को जल मिलता रहे. इसके बाद में भगवान का स्नान और अभिषेक किया जाता है. उसके बाद पुनः यह सवारी अपने-अपने मंदिरों में पहुंचती है.
किसान पहली फसल मंदिर में देते हैं
जनजाति जिले बांसवाड़ा में जल को देवता के रूप में पूजा जाता है और जलझूलनी ग्यारस इसी को चरितार्थ करते हुए मनाई जाती है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन यहां के किसान वर्ग के लोग अपनी पहली फसल भी भगवान को अर्पित करते हैं, उसके बाद ही उसका उपयोग करते हैं.
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