बाड़मेर में मानसून की बेरुखी के कारण पहली बारिश के बाद कर्ज लेकर बोई गई बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार की फसलें खेतों में ही सूखकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं. फसलों के नष्ट होने से किसानों पर साहूकारों और बैंकों के कर्ज का भारी बोझ आ गया है, वहीं मवेशियों के लिए चारे और पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. प्रभावित किसान और स्थानीय जन-प्रतिनिधि सरकार से जल्द गिरदावरी करवाकर आर्थिक सहायता देने तथा पशुधन के लिए चारे-पानी के इंतजाम की मांग कर रहे हैं.
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