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Rajasthan Govt Schools: राजस्थान के 6041 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं, अगले महीने से शुरू हो रहे हैं बोर्ड एग्जाम

शिक्षक नेता किशोर पुरोहित का कहना है कि फरवरी के अन्तिम सप्ताह में बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं. कई स्कूलों में प्राचार्य नहीं हैं. ऐसे में प्रोमोट हुए वाइस प्रिंसिपल्स को काउंसलिंग करवा कर जल्द ही पोस्टिंग देनी चाहिए.

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Rajasthan Govt Schools: राजस्थान के 6041 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं, अगले महीने से शुरू हो रहे हैं बोर्ड एग्जाम
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Rajasthan News: राजस्थान में बोर्ड की परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है और इस माह के आखिर में इसकी शुरुआत हो जाएगी. लेकिन राज्य के करीब 6041 स्कूल प्रिंसिपल के बगैर चल रहे हैं. इसकी वजह प्रिंसिपल के पदों पर डीपीसी प्रोसेस का अटक जाना. दरअसल, शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के सभी खाली पदों को प्रमोशन के जरिए ही भरने का प्रावधान है. ऐसे में वर्ष 2023-24 की डीपीसी बकाया होने की वजह से राज्य के स्कूलों में करीब 6041 पद रिक्त हो गए हैं. 

कोर्ट ने प्रक्रिया पर लगाई रोक

शिक्षा विभाग ने वाइस प्रिंसिपल का नया कैडर बना कर पिछले साल फरवरी माह में 9854 लेक्चरर्स को वाइस प्रिंसिपल बनाया था. लेकिन लेक्चरर्स की वरिष्ठता का मामला कोर्ट में होने के कारण पिछले 12 महीनों से इनकी पोस्टिंग अटकी हुई है. प्रमोट हुए वाइस प्रिंसिपल्स के लिए 23 मई से 28 जून तक ऑनलाइन काउंसलिंग भी निर्धारित की गई थी. लेकिन ये शुरू होती उससे पहले ही कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी. ऐसे में जहां वाइस प्रिंसिपल की पोस्टिंग पर रोक लगी हुई है, वहीं प्रिंसिपल की डीपीसी भी नहीं हो पा रही है.

एक स्कूल में कई उप प्राचार्य

शिक्षक नेता किशोर पुरोहित का कहना है कि फरवरी के अन्तिम सप्ताह में बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं. कई स्कूलों में प्राचार्य नहीं हैं. ऐसे में प्रोमोट हुए वाइस प्रिंसिपल्स को काउंसलिंग करवा कर जल्द ही पोस्टिंग देनी चाहिए. एनडीटीवी की टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल की और सम्बन्धित व्यक्तियों से बात की. जिसमें सामने आया कि पिछले चार सालों से स्कूलों को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है, लेकिन स्टाफ की तरफ तवज्जो नहीं दी जा रही है. इस समय करीब 17 हजार उच्च माध्यमिक स्कूलों में से 6 हजार स्कूल बिना संस्था प्रधान के चल रहे हैं. उधर वाइस प्रिंसिपल के प्रमोशन में चयनित 9854 लोगों को नए स्कूलों में पोस्टिंग नहीं मिलने के कारण एक ही स्कूल में कई कई उप प्राचार्य हो गए हैं.

लिस्ट में नियमों का पालन नहीं

अंग्रेजी विषय के लेक्चरर्स ने वरिष्ठता को लेकर कोर्ट में पिटीशन दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि व्याख्याताओं की सिनियोरिटी लिस्ट में नियमों का पालन नहीं किया गया. पिछले 50 सालों से राज्य सरकार की तरफ से व्याख्याताओं की सिनियोरिटी का निर्धारण लोक सेवा आयोग द्वारा जारी नियुक्ति की अनुशंसा तारीख के अनुसार किया जाता है. मगर इस बार पोस्टिंग की तिथि के मुताबिक किया गया, जिसके कारण अंग्रेजी के व्याख्याता वरिष्ठता में पीछे रह गए.

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