विज्ञापन
  • ब्लॉग राइटर

    ब्लॉग राइटर

  • img

    न्याय से पहले तय हो- न्याय की ‘डेडलाइन’

    अदालतों से ये अपेक्षा तो रहेगी ही कि वो सबकी आसान पहुँच में हों और संवेदनशील हों. किसी भी पेशे में निष्णात होकर निस्वार्थ होना और सबके समय की क़ीमत समझना, दुर्लभ गुण है. 

  • img

    फ़िज़ूलखर्ची: आख़िर, अफ़सरों को भी अखरी?

    सरदार पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवाओं को ‘स्टील फ़्रेम’ कहा था जो देश को बाँधे रखने के लिए, बिना निजी स्वार्थ के, बिना पक्षपात, बिना भ्रष्ट आचरण और बिना किसी ईनाम और अपेक्षा के काम करेंगे. आज इसी नौकरशाही को अपने ही तंत्र से ढेरों शिकायत हैं.

  • img

    सरकारी स्कूलों को पछाड़ने की साज़िश

    प्राथमिक कक्षाओं से 1.9%, उच्च प्राथमिक से 5.2% और सेकेंडरी लेवल से 14.1% बच्चे हर साल पढ़ाई छोड़ रहे हैं.

  • img

    पानी से ही सिंचेगा विकास का पौधा

    गर्मी के शुरू होते ही एक बार फिर राजस्थान में पानी की क़िल्लतों की कहानियाँ सामने आने लगी हैं.

  • img

    फिर गढ़े जाएँ ‘गाँव’

    बरसों से उपेक्षा का शिकार रहे गाँवों की तस्वीर बदलने को लेकर गंभीर चिंतन और ईमानदार प्रयास की ज़रूरत है.

  • img

    सरकारी स्कूलों से ही मज़बूत होगी शिक्षा की नींव

    वो दौर ज़्यादा पुराना नहीं, जब सरकारी स्कूलों की हैसियत वही थी, जो आज अच्छी पढ़ाई और माहौल देने वाले निजी स्कूलों की है. धीरे-धीरे हम उस ओर पहुँच गए, जहाँ सरकारी कॉलेजों में तो मुफ्त या किफायती पढ़ाई के लिए दाखिले की होड़ जारी रही, लेकिन सरकारी स्कूल ख़स्ताहाल हो गए.

  • img

    जनसेवा में एक जाजम पर बैठने वालों की ज़रूरत

    ‘VIP कल्चर’ हमारी संस्कृति है ही नहीं. लोकतंत्र में लोक से परे कोई नहीं. जो भी निस्वार्थ भाव से काम करने की सोच से आगे बढ़ रहा है, असली सत्ता उसी की है, लोगों का प्रिय भी वही बना रहेगा.

  • img

    अजमेर हो या कहीं और - कब रुकेगा दुष्कर्म और दरिंदगी का दौर

    महिला अपराधों में राजस्थान अव्वल ही नहीं, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय औसत से कई पायदान आगे है.

  • img

    कैसा हो बजट का ‘जेंडर’ पहनावा?

    बजट महिलाओं के सदियों पुराने घावों पर लगाई जाने वाली मरहमपट्टी भर नहीं है, बल्कि समाज के उसूलों को नया सिरा थमाने का जरिया भी है.

Close