
Why women dont want to live with in laws: शादी के बाद हर लड़की का सपना होता है कि उसका ससुराल ऐसा हो जहां सास मां जैसा प्यार और ससुर पिता जैसा,लेकिन ऐसा आज के समय में कम ही हो पा रहा है.क्योंकि आजकल की लड़कियां परिवार के साथ तालमेल तो बिठाना चाहती है. लेकिन दूर- दूर रह कर.पहले जहां लड़कियों शुरू से ही संयुक्त परिवार की चाहत रखती थी वहीं अब वह एकल परिवारों की तरफ ज्यादा आकर्षित होने लगी है. पेरेट्स भी शादी के समय ज्यादातर अपनी बेटियों के लिए ऐसे परिवार की चाहत रखते है जहां सिर्फ माता- पिता हो. और लड़का अपने घर से दूर रहता हो.जिससे उनकी लड़की अपना वैवाहिक जीवन अच्छे से निभा पाएं.लड़कियों के माता पिता की इसी सोच के कारण उनकी बेटियों के अंदर भी सास- ससुर के साथ रहने की इच्छा अब खत्म सी हो रही है.इसके पीछे कई सामाजिक,मानसिक और व्यावहारिक कारण होते हैं. यहां उन 5 प्रमुख संभावित कारणों के बारे में बताया जा रहा है,जिसकी वजह से लड़कियां शादी के बाद अपने ससुरालवालों के साथ रहना नहीं चाहती हैं.
प्राइवेसी
आज की लड़की आधुनिक होने के साथ-साथ खुले विचारों वाली भी है. वह नहीं चाहती कि कोई उसकी प्राइवेसी (Privacy) पर नज़र रखे. जब वह अपने मायके में थी, तो उसे वह सारी आज़ादी मिली जो वह चाहती थी. लेकिन शादी के समय उसे डर लगने लगता है कि कहीं उसके ससुराल वाले उससे यह निजता न छीन लें. जिसके कारण वह ससुराल में ही कैद होकर रह जाएगी. इसलिए वह शादी के शुरूआती दिनों से ही अलग रहने का फैसला कर लेती है.
तनाव
कई बार विचारों के टकराव के कारण अक्सर घर में तनाव (Depression) बना रहता है. क्योंकि सदियों से यह कहावत प्रचलित है कि सास कभी बहू के लिए मां नहीं बन सकती और बहू कभी सास के लिए बेटी नहीं बन सकती. इस मान्यता के कारण कई बार दोनों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है. क्योंकि पुराने विचार वर्तमान विचारों को अपना नहीं पाते. इसके कारण उन्हें लगता है कि घर में उनका सम्मान नहीं हो रहा है. और घर में हमेशा तनाव और लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं.इससे बचने के लिए लड़कियां अपने पति के साथ अकेले रहना पसंद करती हैं.
जनरेशन गैप
एक लड़की जन्म से ही अपने माता-पिता के साथ रहती है, इसलिए वह बचपन से ही अपने परिवार के रीति-रिवाजों और परंपराओं को समझती है. वह वहां एडजस्ट जैसे शब्द नहीं जानती. लेकिन जब वह शादी के बाद ससुराल आती है, तो उसे वहां विचारधारा और परंपराओं में जनरेशन गैप (Generation Gap) को महसूस करती है. सास हमेशा बहू को बताती है कि उसके घर में क्या नियम हैं, उसके परिवार में कैसे रहना है, क्या किया जाता है और उसके समय में क्या होता था. ये सब बातें बताने के साथ-साथ वह यह भी चाहती है कि वह जल्द ही इसे अपना ले, जिसके लिए लड़की मानसिक रूप से तैयार नहीं होती. यह सारी जानकारी लड़की के लिए नई होती है और उनमें से कुछ बातें उसकी विचारधारा से मेल नहीं खातीं. ऐसे में दोनों के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो जाता है, जिससे तनाव हो सकता है.
पति के साथ वक्त न बिता पाना
अक्सर देखा जाता है कि संयुक्त परिवार में रहने के कारण पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ समय बिताना बहुत मुश्किल लगता है.जब भी वे साथ में समय बिताने के बारे में सोचते हैं, तो किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाता. कभी उन्हें किसी के घर जाना होता है. कभी पति को अपनी मां से बात करनी होती है. ऐसी कई बातें उनके सामने आती रहती हैं, जिसका असर उनके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है.
करियर और परिवार में चुनाव
आजकल की लड़कियां अपने करियर को लेकर काफी गंभीर हैं. वो शादी के बाद जॉब करना चाहती हैं ताकि अपने पति का साथ दे सकें. लेकिन जब सास-ससुर बहू और बेटे के साथ रहते हैं तो ज्यादातर लड़कियों पर ये दबाव रहता है कि वो जॉब और करियर के चलते घर नहीं संभाल पा रही हैं.जिसकी वजह से उनसे जॉब छोड़ने की उम्मीद की जाती है.या फिर उन पर हमेशा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का दबाव रहता है.और अगर लड़की के लिए ये संभव नहीं है तो उस पर परिवार से पहले खुद को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया जाता है. सास-ससुर उम्मीद करते हैं कि बहू जॉब और घर दोनों संभाले. वो बेटे की थकान और परेशानी समझते हैं लेकिन बहू की नहीं. ऐसी स्थिति में भी लड़की शादी के बाद ससुराल में नहीं रहना चाहती.