भजनलाल सरकार ने पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव करके राजनीतिक हलचल मचा दी है. इस फैसले को कांग्रेस नेता राजनीतिक द्वेष और जातीय समीकरणों पर आधारित बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे प्रशासनिक सुविधा और आमजन के हित में बता रही है. धोरीमन्ना उपखंड मुख्यालय पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी स्थानीय लोगों के साथ धरने पर बैठ गए. उन्होंने कहा कि यह फैसला स्थानीय लोगों की भावनाओं के खिलाफ है और वे इसे वापस लेने तक पीछे नहीं हटेंगे.
"आखिरी सांस तक संघर्ष रखेंगे"
उन्होंने आखिरी सांस तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है. मीडिया से बात करते हुए हेमाराम चौधरी भावुक हो गए, और उनकी आंखों से आंसू छलक गए. दूसरी ओर, सरकार ने गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर से बालोतरा जिले में शामिल करने के बाद क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और भवनों पर 'जिला बालोतरा' लिखवाने का काम शुरू कर दिया है, जिससे साफ है कि फैसले पर कोई पुनर्विचार नहीं होगा.

धरने पर बैठे लोग और कांग्रेस नेता.
कांग्रेस सरकार में बना था बालोतरा अलग जिला
कांग्रेस सरकार ने नए जिलों का गठन किया था, जिसमें बाड़मेर जिले से बालोतरा को अलग कर नया जिला बनाया गया. उस समय बायतू तहसील को बालोतरा में शामिल किया गया था, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना बाड़मेर जिले में ही बने रहे. लेकिन, भजनलाल सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को फैसला करके 2 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर बड़ा फेरबदल कर दिया. इसके तहत बायतू को बालोतरा से हटाकर बाड़मेर जिले में शामिल किया गया, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर से बालोतरा जिले में स्थानांतरित कर दिया गया. इस बदलाव से स्थानीय लोगों में असंतोष भी फैल गया है.
पूर्व सीएम गहलोत ने बताया तुगलकी फरमार
फैसले के बाद से कांग्रेस की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तुगलकी फरमान करार देते हुए कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से लिया गया निर्णय है, जो पश्चिमी राजस्थान के विकास को प्रभावित करेगा.
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और बायतू विधायक हरीश चौधरी ने तो यहां तक आरोप लगाया कि एक विशेष जाति को निशाना बनाकर बायतू को तोड़ने का प्रयास किया गया है, और यह फैसला जातीय समीकरणों पर आधारित है.

लोगों ने रैली निकाली.
भाजपा बोली-आमजन को फायदा
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए फैसले को जायज ठहराया है. भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा ने कहा कि कांग्रेस तो सरकार के हर फैसले का विरोध करती ही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परिवर्तन संगठनात्मक ढांचे और संस्कृति रीति रिवाजों के आधार पर किया गया है, जहां बायतू पहले से बाड़मेर जिले के साथ जुड़ा था, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना बालोतरा के साथ.
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कार्यालयों पर नए नाम लिखवाने का काम जारी रहना इस बात का प्रमाण है कि फैसला अंतिम है.
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