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मामूली मॉडिफिकेशन पर बस रजिस्ट्रेशन कैंसिल क्यों? याचिकाकर्ता की दलील, राजस्थान हाईकोर्ट का अंतरिम स्टे

जैसलमेर में हुए बस हादसे के बाद से परिवहन विभाग बसों में हो रहे मोडिफिकेशन के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. इसे लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था.

मामूली मॉडिफिकेशन पर बस रजिस्ट्रेशन कैंसिल क्यों? याचिकाकर्ता की दलील, राजस्थान हाईकोर्ट का अंतरिम स्टे
प्रतीकात्मक तस्वीर

Rajasthan High Court: राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने एक प्राइवेट बस के रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण और संचालन पर लगे प्रतिबंध को स्थगित कर दिया है. अदालत ने 17 फरवरी को प्रार्थी के पक्ष में अंतरिम स्टे ऑर्डर जारी किया. दरअसल, परिवहन विभाग ने जांच के दौरान बस में मामूली संशोधन (माइनर मोडिफिकेशन) पाए जाने का हवाला देकर उसका पंजीकरण रद्द कर दिया था. इसके बाद बस का संचालन तत्काल बंद करा दिया गया. इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.

अधिवक्ता की दलील- यह प्राकृतिक न्याय के खिलाफ

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता कपिल खंडेलवाल और डॉ. गुंजन शर्मा ने सशक्त पैरवी की. अधिवक्ता कपिल खंडेलवाल ने बताया कि बदलाव बेहद मामूली था, जो वाहन की मूल संरचना या सुरक्षा मानकों को प्रभावित नहीं करता. साथ ही, बिना उचित सुनवाई के रजिस्ट्रेशन रद्द करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है.

प्रार्थी को फिलहाल अस्थायी राहत

सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल मामले को प्रार्थी को राहत देने योग्य माना. विभाग के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी. इससे प्रार्थी को बस चलाने के लिए अस्थायी राहत मिली है. हालांकि अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई पर निर्भर करेगा. अधिवक्ता गुंजन शर्मा ने बताया कि मामूली संशोधन पर पंजीकरण रद्द करना अनुचित कार्रवाई है. यह फैसला परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि निजी बस संचालकों का कहना है कि छोटी तकनीकी कमियों पर कठोर सजा दी जाती है. 

लगातार जारी है सरकार की कार्रवाई

गौरतलब है कि जैसलमेर में हुए बस हादसे के बाद से परिवहन विभाग बसों में हो रहे मोडिफिकेशन को लेकर लगातार कार्रवाई कर रही है. जैसलमेर बस हादसे की बड़ी वजह बस में कराए गए मोडिफिकेशन को माना गया था. इसके साथ ही मनोहरपुर और कई अन्य बस हादसों में मोडिफिकेशन एक बड़ी वजह हादसों की रही. इसके बाद कोर्ट ने भी मामले में संज्ञान लिया था.

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