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'बिल्डिंग तो शानदार है, पर क्या बच्चा स्कूल में सुरक्षित है?' अमायरा केस बाद सीकर में पेरेंट्स ने उठाई 3 बड़े बदलाव की मांग

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल परिसर में होने वाली बदमाशी, उत्पीड़न, रैगिंग और एक-दूसरे को धमकाने जैसी घटनाओं पर एंटी-बुलिंग कमेटी के माध्यम से प्रभावी रोक लगाई जा सकती है. यदि किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है तो कमेटी की निगरानी में निष्पक्ष जांच कर बच्चों की समस्या का समाधान किया जा सकता है.

'बिल्डिंग तो शानदार है, पर क्या बच्चा स्कूल में सुरक्षित है?' अमायरा केस बाद सीकर में पेरेंट्स ने उठाई 3 बड़े बदलाव की मांग
नीरजा मोदी स्कूल जैसा कांड फिर न हो! सीकर के पेरेंट्स ने सरकार से मांगी 'एंटी-बुलिंग कमेटी' की सुरक्षा
NDTV Reporter

Rajasthan News: जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हुई 9 वर्षीय अमायरा की हृदयविदारक मौत ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना के बाद सीकर के अभिभावक अपने बच्चों की मानसिक सुरक्षा को लेकर लामबंद हो गए हैं. NDTV से खास बातचीत में अभिभावकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमें केवल बड़ी बिल्डिंग और ऊंची फीस नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल चाहिए.'

अमायरा कांड: जब रक्षक ही बन गए भक्षक

अभिभावकों का आक्रोश जयपुर की उस घटना पर है, जहां सीबीएसई (CBSE) की जांच में सामने आया कि नन्ही अमायरा 18 महीने तक स्कूल में प्रताड़ित होती रही. घटना के दिन भी उसने 45 मिनट में 5 बार टीचर से मदद मांगी, लेकिन मदद के बजाय उसे डांट मिली. सीकर के अभिभावकों का कहना है कि अगर स्कूल में सक्रिय एंटी-बुलिंग कमेटी होती, तो शायद अमायरा आज जीवित होती.

सीकर के अभिभावकों ने कहा, 'अमायरा की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे एजुकेशन सिस्टम की संवेदनशीलता की मौत है. हम नहीं चाहते कि सीकर या किसी भी शहर में कोई और अमायरा इस तरह सिस्टम की बलि चढ़े.'

अभिभावकों की सरकार से 3 बड़ी मांगें

सीकर के जागरूक अभिभावकों ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के सामने अपनी मांगें रखी हैं.

  1. हर प्राइवेट और सरकारी स्कूल में 'एंटी-बुलिंग और एंटी-रैगिंग कमेटी' का गठन अनिवार्य हो और इसकी सूचना स्कूल के बाहर बोर्ड पर दर्ज हो.
  2. हर महीने पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित हो, जिसमें बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा उनके मानसिक व्यवहार और सुरक्षा पर चर्चा हो.
  3. टीचर्स को 'एंटी-बुलिंग' नियमों की विशेष ट्रेनिंग दी जाए ताकि वे बच्चों के साथ फ्रेंडली और सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें.

'बच्चे घर से ज्यादा स्कूल में रहते हैं, वहां उनका डरना खतरनाक है'

अभिभावकों ने बातचीत के दौरान कुछ बेहद गंभीर बिंदु उठाए. उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे घर पर बात साझा नहीं कर पाते. स्कूल में एक ऐसा 'सेफ जोन' होना चाहिए जहां बच्चा बिना डरे शिकायत कर सके. यदि कोई शिकायत आती है, तो स्कूल उसे दबाने के बजाय कमेटी के जरिए निष्पक्ष जांच करे. स्कूलों में केवल काउंसलर का नाम होना काफी नहीं, उनका सक्रिय होना जरूरी है ताकि डिप्रेशन या सुसाइड जैसे आत्मघाती कदमों को समय रहते रोका जा सके.

क्या था अमायरा सुसाइड केस?

1 नवंबर 2025 को जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर कक्षा 4 की छात्रा अमायरा ने जान दी थी. इस घटना के बाद स्कूल ने सबूत मिटाने की कोशिश की और पुलिस के आने से पहले खून के धब्बे साफ कर दिए. हद तो तब हो गई जब पुलिस ने भी मृतका का स्कूल बैग जब्त करने में 9 दिन लगा दिए. इसके बाद CBSE ने जांच की, जिसमें पाया गया कि स्कूल में सुरक्षा समिति नहीं थी. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था कि टीचर ने मदद मांगने पर बच्ची को पूरी क्लास के सामने अपमानित किया था. इसके चलते 30 दिसंबर 2025 को CBSE ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी.

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