
Rajasthan Politics after Exit Poll: राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को जारी होंगे. इसमें एक मात्र एक दिन का समय बाकी है. इससे पहले गुरुवार को कई एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आए. इन एग्जिट पोल्स में ज्यादातर एजेंसियों ने राजस्थान में राज बदलने की बात कही है. मतलब राजस्थान अपनी राजनीतिक रवायत को जारी रखने जा रहा है. 10 बड़ी सर्वे एजेंसियों में से 7 ने भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया है. जबकि तीन ने कांग्रेस के बढ़त की बात कही है. हालांकि एग्जिट पोल के बाद भी दोनों दलों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.
दूसरी ओर एग्जिट पोल के बाद राजस्थान के सियासी पंडित निर्दलीय और छोटे पार्टियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बता रहे हैं. राजनीति के जानकारों की माने तो यदि कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत तक नहीं पहुंचती हैं तो निर्दलीय और छोटे दलों के विजयी प्रत्याशियों के पास सत्ता की चाबी होगी.
इस बीच एग्जिट पोल के बाद राजस्थान के मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी और छोटे दलों के उम्मीदवारों के पास भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं के फोन आने शुरू हो गए है. दरअसल गुरुवार को जारी एग्जिट पोल्स ने मुख्य नेताओं के साथ प्रत्याशियों और लोगों की धड़कन बढ़ा दी है. एग्जिट पोल्स के बाद निर्दलीय प्रत्याशियों के जीत के अनुमान को लेकर प्रमुख नेताओं के द्वारा संपर्क साधना शुरू हो गया है.
भरतपुर जिले की सात विधानसभा क्षेत्र में से तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां निर्दलीय और छोटे दलों के प्रत्याशी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं. ऐसे में इन तीनों नेताओं से प्रदेश के प्रमुख नेता संपर्क करने में जुट गए हैं. जिले की बयाना-रूपबास विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बागी निर्दलीय प्रत्याशी ऋतु बनावत की जीत का अनुमान लगाया जा रहा है.
यही वजह है कि राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के द्वारा उनसे संपर्क साधा जा रहा है. कांग्रेस खेमे से भरतपुर के विधायक और सीएम अशोक गहलोत के खास समझे जाने वाले डॉक्टर सुभाष गर्ग ने भी बनावत से संपर्क साधा है.
नगर विधानसभा क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी नेम सिंह फौजदार और कामां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार सीए मुख्तयार अहमद के पास भी बड़े नेताओं के फोन आने लगे हैं. इन दोनों की स्थिति भी मजबूत बताई जा रही है. उनसे भी प्रदेश के नेताओं ने संपर्क साधा है. हालांकि तीनों नेताओं के द्वारा बताया गया है कि प्रतिदिन प्रदेश के दोनों पार्टियों के प्रमुख नेताओं के दर्जनों फोन आ रहे हैं लेकिन किसके आ रहे हैं यह निजी मामला है.
यही वजह है कि प्रदेश में जो निर्दलीय उम्मीदवार हैं और उनके जीतने की पूरी उम्मीद है उनसे प्रदेश के प्रमुख नेता लगातार संपर्क साध रहे हैं. जिले की अन्य विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों में सीधी टक्कर देखने को मिल रही है.
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