
Truck Drivers Protest over New Hit and Run Law: केंद्र सरकार के हिट एंड रन को लेकर नए कानून के विरोध में देशभर में ड्राइवर सड़कों पर उतर गए हैं. बालोतरा जिले में भी आज इस कानून के विरोध में ड्राइवर सड़कों पर उतरे वहीं कानून को वापस लेने की मांग को लेकर बालोतरा से पचपदरा के बीच जगह जगह बेरिकेड लगा कर सड़क जाम कर दी. कई जगह हाईवे पर टायर जला कर प्रदर्शन किया गया. बालोतरा में शनि मंदिर और बाईपास चौराहे पर कंटीली झाड़ियां डाल कर हाईवे जाम कर दिया।
रिफाईनरी जाने वाले सैंकड़ों वाहन अटके
पचपदरा में निर्माणाधीन रिफाईनरी में सुबह बालोतरा व पचपदरा से हजारों मजदूर बसों के द्वारा निर्माण स्थल तक पहुंचते हैं. आज चक्काजाम के कारण मजदूरों को ले जाने वाली बसें रास्ते में ही अटक गई. हाईवे जाम होने के कारण उन्हें वापस पैदल अपने घरों को लौटने को मजबूर होना पड़ा है. रिफाईनरी जाने वाले हाईवे पर सैंकड़ों की संख्या में ड्राइवर सड़कों पर उतरे. ऐसे में आज रिफाईनरी में निर्माण कार्य भी अटक गए हैं.

थम गए ट्रकों के पहिये
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प
सुबह से हाईवे समेत अन्य सड़क मार्ग पर प्रदर्शन के कारण यात्री बसें भी अटक गई ऐसे में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जगह-जगह जाम के कारण जोधपुर,बाड़मेर व जालोर जाने वाली बसें रास्ते में अटक गई। ड्राइवरों के प्रदर्शन को देखते हुए यात्रियों को भी पैदल वापस लौटना पड़ा है. हाईवे जाम के बाद पुलिस भी हरकत में आई और जाम लगाकर प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों से बात-चीत करने कोशिश कि, लेकिन बात नहीं बनी. हालांकि पुलिस की समझाइश में बाद छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू की गई है. वहीं प्रदर्शन के दौरान आपातकालीन वाहनों को आने जाने की अनुमति दी गई। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प की भी खबर है.
क्या है नया हिट एंड रन कानून ?
औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों में बदलाव की वजह से हिट एंड रन मामलों में सजा बढ़ गई है, जिससे देश भर में ट्रक ड्राइवरों और बस ऑपरेटरों का विरोध शुरू हो गया है. नए कानून के तहत फरार और घातक दुर्घटना की सूचना न देने पर ड्राइवरों को 10 साल तक की जेल हो सकती है. इससे पहले,आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत आरोपी को केवल दो साल तक की जेल हो सकती थी.

कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प भी देखने को मिली
'कोई भी जानबूझकर दुर्घटना नहीं करता'
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि, कोई भी जानबूझकर दुर्घटना नहीं करता है और ड्राइवरों को डर है कि अगर वे घायलों को अस्पताल ले जाने की कोशिश करेंगे तो भीड़ उनकी पिटाई कर देगी, इसलिए वे इस "काले कानून" को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.
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