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This Article is From Feb 16, 2024

450 साल पुरानी धरोहर संजोए हिंदी साहित्य समिति पर क्यों लटक रही है नीलामी की तलवार?

राजस्थान के भरतपुर हिंदी साहित्य समिति पर नीलामी की तलवार लटक रही है. 112 साल पुरानी और 450 साल पुरानी धरोहर संजोए इस संस्थान की आर्थिक हालात बेहद दयनीय है.

450 साल पुरानी धरोहर संजोए हिंदी साहित्य समिति पर क्यों लटक रही है नीलामी की तलवार?
भरतपुर हिंदी साहित्य समिति क्यों हो रही है नीलाम

Hindi Sahitya Samiti Bharatpur: सरकार अक्सर साहित्य बचाने की बात करती है. इसके लिए अभियान भी चलाए जाते हैं. लेकिन हकीकत में तस्वीर कुछ उलट ही दिखती है. इसका सबूत राजस्थान के भरतपुर में स्थित हिंदी साहित्य समिति है जो 112 साल पुराना है और 450 साल पुरानी धरोहर को संजोए हुए हैं. लेकिन विडंबना यह है कि इस पर अब नीलामी की तलवार लटकी है. राज्य सरकार के द्वारा इसे आर्थिक सहयोग न मिल पाने की वजह से यहां काम कर रहे कर्मचारियों का वेतन 6 महीने से रूका है. हाल यह है कि अब कर्मचारियों का वेतन हिंदी साहित्य समिति को नीलाम कर देने की बात हो रही है. कोर्ट नीलामी की नोटिस भी भेज चुका है. इसकी आखिरी तारीख 16 फरवरी थी लेकिन अब इसे तत्काल रद्द किया गया है. लेकिन अब 19 फरवरी को इस पर फिर से फैसला लिया जाएगा.

आजादी की लड़ाई के समय भी समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा था. लेकिन इसके बावजूद इस धरोहर को बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किसी तरह का कार्य नहीं किया जा रहा है. हालांकि, हिंदी साहित्य समिति राजनीति का भी शिकार हो रही है. इस वजह से इसकी आर्थिक हालत खराब हुई है.

5 करोड़ के बजट पास होने के बाद भी नहीं मिला पैसा

बताया जाता है कि कांग्रेस की गहलोत सरकार में भरतपुर हिंदी साहित्य समिति के लिए 5 करोड़ रुपये के बजट का ऐलान हुआ था. हालांकि, तब इसमें से 1.11 करोड़ रुपये ही पैसा समिति को दिया गया. बाकी पैसे आज भी नहीं मिले हैं. जो पैसे मिले थे उससे तो समिति चल रही थी. लेकिन अब कर्मचारियों को वेतन देने के लिए समिति के पास पैसे नहीं है. बता दें, साल 2003 में हिंदी साहित्य समिति को सरकार के अधीन किया गया था. इसके बावजूद यहां काम कर रहे कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं मिल पाया है. 

वहीं, अब भजन लाल शर्मा की सरकार राजस्थान में है. लेकिन अब तक हिंदी साहित्य समिति को लेकर फैसला नहीं किया गया है. हाल ही में भजन लाल सरकार ने विधानसभा में बजट पेश किया है लेकिन इसमें हिंदी साहित्य समिति को बचाने के लिए किसी तरह की घोषणाएं नहीं की गई.

अब जो कर्मचारी यहां बचे हैं उन्होंने वेतन के लिए कोर्ट में हिंदी साहित्य समिति को नीलाम करने की बात कही है.

समिति के पास 450 साल पुरानी धरोहर

1912 में स्थापित हिंदी साहित्य समिति के पास 450 वर्ष पुराणी 1500 से ज्यादा पांडुलिपियां, 44 विषयों की किताबें और तमाम साहित्य है.  रविंद्रनाथ टैगोर, मदन मोहन मालवीय, मोरारजी देसाई, राम मनोहर लोहिया समेत कई मशहूर हस्तियां यहां आ चुकी है. लेकिन बजट की तंगी के चलते ये संस्था नीलाम होने के कगार पर है. समिति से जुड़े लोगों की मौजूदा सरकार के दरख्वास्त है की इस संस्था को नीलम होने से बचा लें. 

16 फरवरी थी नीलामी की तारीख

कोर्ट ने हिंदी साहित्य समिति को नीलाम करने के लिए नोटिस भेजा था उसमें पहले 16 जनवरी तारीख दी गई थी लेकिन फिर इसे 16 फरवरी की गई थी. हालांकि, कोर्ट ने इस पर फिर से तत्काल रोक लगा दिया है. लेकिन अब इस पर 19 फरवरी को फिर से सुनवाई होनी है. माना जा रहा है कि राज्य की भजन लाल सरकार इस पर तत्काल फैसला नहीं लेती है तो इसे नीलाम करने की तारीख फिर से जारी की जाएगी.

बता दें, कोर्ट में वेतन और नीलामी को लेकर याचिका कर्मचारी त्रिलोक चंद्र और दाऊ दयाल के द्वारा दी गई है. बताया जा रहा है कि इन्हें वेतन पिछले साल अगस्त 2023 से अब तक नहीं मिला है.

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